Vaishakh Month 2022: अत्यंत कल्याणकारी है वैशाख माह में विष्णु जी की अर्चना, जानें प्रारंभ तिथि व महत्व

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 16, 2022, 09:51 AM IST

Vaishakh Month 2022 Start Date: हिंदू पंचांग का दूसरा महीना वैशाख का महीना होता है। भगवान विष्णु की आराधना के लिए यह महीना बहुत शुभ माना गया है। यहां जानिए इस वर्ष यह महीना कब से प्रारंभ हो रहा है। 

Vaishakh Month 2022: अत्यंत कल्याणकारी है वैशाख माह में विष्णु जी की अर्चना, जानें प्रारंभ तिथि व महत्व

Vaishakh Month 2022 Start Date, End Date, Significance: नव संवत्सर का दूसरा महीना वैशाख अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। माना जाता है कि इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा विधि अनुसार करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जो भक्त सच्ची श्रद्धा से इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करता है उस पर विष्णु जी की विशेष कृपा बरसती है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, वैशाख माह में स्नान, दान, जप-तप, कल्पवास का बहुत महत्व है। इस महीने में भगवान विष्णु के भक्त पवित्र नदियों में स्नान करने जाते हैं। वैशाख स्नान तो चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से ही प्रारंभ हो जाता है। पंडितों के अनुसार, इस वर्ष वैशाख माह में शनि ग्रह का प्रमुख परिवर्तन होने वाला है। यहां जानें इस वर्ष वैशाख माह कब से शुरू हो रहा है, कब खत्म हो रहा है और इस महीने का महत्व क्या है। 

वैशाख माह की प्रारंभ और समापन तिथि (Vaishakh Month 2022 Start And End Date)

वैशाख माह प्रारंभ तिथि: 17 अप्रैल 2022 

वैशाख माह समापन तिथि: 16 मई 2022

वैशाख माह का महत्व क्या है? 

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, वैशाख माह अत्यंत कल्याणकारी है। इस महीने में प्यासे लोगों और जानवरों को पानी पिलाने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस महीने में प्यासे लोगों और जानवरों को पानी पिलाने से फल अधिक गुना हो जाता है। इसके साथ वैशाख का महीना खुशियां, शांति और उन्नति लेकर आता है। इसके साथ इस महीने में लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। इस महीने में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से और उन्हें लाल गुलाब या कमल का फूल अर्पित करने से आर्थिक परिस्थिती बेहतर होती है। धर्म-कर्म के लिहाज से वैशाख का महीना श्रेष्ठ माना गया है। इस महीने में पाप कर्मों से मुक्ति पाने के लिए स्नान-दान किया जाता है। 

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