अध्यात्म

Akshaya Tritiya Katha: अक्षय तृतीया के दिन क्या हुआ था? जानिए इस पर्व की पौराणिक कहानी और इतिहास

Akshaya Tritiya Story (अक्षय तृतीया की कहानी): अक्षय तृतीया एक शुभ दिन है इस बारे में तो सभी जानते हैं। लेकिन इस दिन ऐसा क्या हुआ था जो इस तिथि को साल के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाने लगा?

Image

Akshaya Tritiya Story

Akshaya Tritiya Story (अक्षय तृतीया की कहानी): अक्षय तृतीया जिसे कई जगह पर आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। ये हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। जो वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन मनाया जाता है। इस दिन को मुख्य रूप से सोने की खरीदारी से जोड़कर देखा जाता है। अक्षय तृतीया के दिन कई लोग सोने की खरीदारी करते हैं। इतना ही नहीं ये दिन वस्त्र-आभूषणों की खरीदारी के अलावा विवाह, गृह प्रवेश, वाहन और मकान की खरीदारी आदि कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन पितरों को किया गया तर्पण और पिंडदान भी अक्षय फल प्रदान करता है। इस पर्व के महत्व के बारे में जानने के लिए इसकी पौराणिक कहानी को पढ़ना होगा। जो इस प्रकार है...

Akshaya Tritiya Story (अक्षय तृतीया की कहानी)

अक्षय तृतीया की पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक धर्मदास नामक वैश्य था। जो अपने परिवार के साथ एक छोटे से गांव में रहता था। वह बहुद गरीब था जिस कारण उसे हमेशा अपने परिवार के भरण-पोषण की चिंता रहती थी। धर्मदास बहुत धार्मिक पृव्रत्ति का व्यक्ति था उसका सदाचार और देव एवं ब्राह्मणों के प्रति उसकी श्रद्धा पूरे गांव में प्रसिद्ध थी। एक दिन मार्ग में उसने कुछ ऋषियों को अक्षय तृतीया के महत्त्व का वर्णन करते सुना। वह ऋषि कह रह थे कि अक्षय तृतीया बुधवार से संयुक्त होने पर महान फल प्रदान करने वाली होती है। अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर ही नर-नारायण, हयग्रीव एवं परशुराम अवतार प्रकट हुये थे। ऐसे में इस दुर्लभ संयोग के अवसर पर किये जाने वाले दान, हवन, पूजन आदि कर्मों का अक्षय फल प्राप्त होता है। अत: ऐसा फल जिसकी कभी समाप्ति न हो।

ऋषियों के मुख से अक्षय तृतीया व्रत का माहात्म्य सुनकर वह वैश्य सोचने लगा कि यह तो अति उत्तम व्रत है अतः मुझे भी इसका पुण्यलाभ अर्जित करना चाहिये। इसके बाद अक्षय तृतीया पर्व के आने पर उस वैश्य ने सुबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करके विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की, व्रत के दिन सामर्थ्यानुसार उसने जल से भरे घड़े, पंखे, नमक, गेंहू, गुड़, घी, दही, जौ, सत्तू, चावल, सोना तथा वस्त्र आदि वस्तुएं भगवान के चरणों में रख कर ब्राह्मणों को दान कर दी।

लेकिन इतनी सब चीजों का दान करने से पहले धर्मदास के परिवार वालों ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की। उन्होने कहा कि अगर धर्मदास इतना सब कुछ दान में दे देगा, तो परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा। लेकिन धर्मदास ने किसी की नहीं सुनी और उसने पूरी श्रद्धा से दान और पुण्य कर्म किए। इतना ही नहीं उसके जीवन में जब भी अक्षय तृतीया का पावन पर्व आया उसने हर बार धर्मदास ऐसा ही किया।

अनेक रोगों से ग्रस्त होने और वृद्ध होने के उपरांत भी उसने अक्षय तृतीया का उपवास करके धर्म-कर्म और दान पुण्य किया। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना। वह इतना धनी और प्रतापी राजा था कि त्रिदेव भी उसके दरबार में अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण का वेष धारण करके उसके महायज्ञ में शामिल होते थे। उसे अपनी संपन्नता पर कभी घमंड नहीं हुआ और वह प्रतापी राजा महान एवं वैभवशाली होने के बावजूद भी धर्म मार्ग पर चलता रहा। माना जाता है कि यही राजा आगे के जन्मों में भारत के प्रसिद्ध सम्राट चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुआ।

जैसे भगवान ने धर्मदास पर अपनी कृपा की वैसे ही जो कोई भी व्यक्ति इस अक्षय तृतीया पर व्रत रख इसकी पावन कथा को सुनता है और विधि विधान से पूजा और दान आदि करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

अक्षय तृतीया का महत्व (Akshya Tritiya Significance)

पुराणों अनुसार अक्षय तृतीया सौभाग्य और सफलता प्रदान करती है। अधिकांश लोग इस दिन सोने की खरीदारी करते हैं क्योंकि मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर सोने खरीदने से भविष्य में अत्यधिक धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु द्वारा की पूजा होती है। हिन्दु पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग का आरम्भ भी अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था। इतना ही नहीं इस दिन भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम जी का जन्म भी हुआ था। इसलिए इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है।

जानिए मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों का वार्षिक राशिफल। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

Laveena Sharma
लवीना शर्मा author

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करि... और देखें

End of Article