अध्यात्म

Shankaracharya Jayanti 2023: 2 साल की उम्र में वेदों का ज्ञान, 6 साल में सन्यास, पूरे देश में सनातन धर्म का प्रचार, जानें शिव के अवतार आदि शंकराचार्य की कहानी

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Apr 25, 2023, 12:15 PM IST

Adi Shankaracharya Jayanti 2023: आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। जो इस बार 25 अप्रैल को मनाई जा रही है। जानिए कौन थे आदि गुरु शंकराचार्य जिन्हें शिव माना जाता है भगवान शिव का अवतार।

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वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती मनाई जाती है

Adi Shankaracharya Jayanti 2023: हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती मनाई जाती है। इस बार ये तिथि 25 अप्रैल मंगलवार को पड़ी है। गुरु शंकराचार्य का जन्म केरल के कालड़ी में नबुन्दरी ब्राह्मण दंपत्ति के घर हुआ था। आदि शंकराचार्य हिन्दू धर्मगुरु थे। जिन्होंने अद्वैत वेदांत के सिद्धांत को समेकित किया और इसे ऐसे समय में पुनर्जीवित किया जब हिंदू संस्कृति का पतन हो रहा था। गुरु शंकराचार्य को भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है। जानिए इनके जीवन से जुड़ी दिलचस्प बातें।

गुरु शंकराचार्य ने 2 साल की छोटी सी उम्र में उपनिषद के ज्ञान और वेद प्राप्त किए

ऐसा माना जाता है कि गुरु शंकराचार्य जी ने महज 2 साल की छोटी सी उम्र में ही वेद, उपनिषद का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। वहीं 7 साल की उम्र में उन्होंने सन्यासी जीवन में प्रवेश कर लिया था।

चार मठों की स्थापना

भारत के चारों कोनों में वेदांत मत का प्रचार करने के साथ ही गुरु शंकराचार्य ने पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में मठों की स्थापना भी की। शंकराचार्य ने दक्षिण भारत में वेदांत मठ की स्थापना की। इसे प्रथम मठ और ज्ञान मठ भी कहा जाता है। इसके बाद जगन्नाथ पुरी में दूसरे मठ 'गोवर्धन मठ' की स्थापना की। फिर पश्चिम में यानी द्वारकापुरी में तीसरे मठ 'शारदा मठ' की स्थापना की और अंत में यानी उत्तर भारत में चौथी मठ 'बद्रिकाश्रम' की स्थापना की।

पूरे देश में किया सनातन धर्म का प्रचार

गुरु आदि शंकराचार्य ने अपने जीवनकाल में चारों दिशाओं में घूमकर चार मठों की स्थापना करने के साथ पूरे देश में धर्म का प्रचार भी किया। इसलिए हर साल इनकी जयंती के शुभ अवसर पर चारों मठों के साथ-साथ पूरे देश में जप, तप, पूजा, हवन इत्यादि करने की परंपरा है।

शिव के अवतार माने जाते हैं गुरु शंकराचार्य

गुरु शंकराचार्य के जन्म के कथाओं के अनुसार उनके पिता शिव गुरु ने अपनी पत्नी संग पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान शिव की पूजा की। जिसके फलस्वरूप भगवान शिव ने उन्हें पुत्र का वरदान दिया। लेकिन भगवान शिव ने साथ में एस शर्त भी रखी कि उनका पुत्र सर्वज्ञ तो होगा लेकिन अल्पायु होगा। लेकिन अगर दीर्घायु की पुत्र की कामना है तो वह पुत्र सर्वज्ञ नहीं होगा। ऐसे में शिव गुरु ने अल्पायु सर्वज्ञ पुत्र की कामना की। कहते हैं इस बात से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने स्वयं ही उनके घर में जन्म लिया। इस बालक का नाम रखा गया शंकर और यही शंकर से बने शंकराचार्य। मान्यता अनुसार आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ क्षेत्र में समाधी ली थी।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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