16 April Sunset Time : 16 अप्रैल 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है। इस दिन वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो भगवान शिव और संध्या पूजन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्यास्त का समय और उसके बाद का गोधूलि काल पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ होता है। पंचांग के अनुसार, 16 अप्रैल को सूर्यास्त का समय शाम 6 बजकर 47 मिनट माना गया है (स्थानानुसार इसमें कुछ मिनट का अंतर हो सकता है)। इसी समय से संध्या काल की शुरुआत होती है, जिसे आध्यात्मिक साधना और पूजा के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है।
आज आपके शहर में कितने बजे होगा सूर्यास्त ?
| क्रम | शहर | सूर्यास्त समय |
|---|---|---|
| 1 | दिल्ली | 6:47 PM |
| 2 | मुंबई | 6:57 PM |
| 3 | कोलकाता | 5:59 PM |
| 4 | चेन्नई | 6:18 PM |
| 5 | बेंगलुरु | 6:29 PM |
| 6 | हैदराबाद | 6:33 PM |
| 7 | अहमदाबाद | 6:59 PM |
| 8 | पुणे | 6:54 PM |
| 9 | जयपुर | 6:54 PM |
| 10 | लखनऊ | 6:36 PM |
| 11 | कानपुर | 6:37 PM |
| 12 | वाराणसी | 6:31 PM |
| 13 | पटना | 6:21 PM |
| 14 | भोपाल | 6:46 PM |
| 15 | इंदौर | 6:49 PM |
| 16 | नागपुर | 6:35 PM |
| 17 | चंडीगढ़ | 6:50 PM |
| 18 | अमृतसर | 6:53 PM |
| 19 | देहरादून | 6:43 PM |
| 20 | हरिद्वार | 6:44 PM |
| 21 | रांची | 6:16 PM |
| 22 | भुवनेश्वर | 6:08 PM |
| 23 | गुवाहाटी | 5:37 PM |
| 24 | श्रीनगर | 6:59 PM |
| 25 | जम्मू | 6:52 PM |
| 26 | सूरत | 6:58 PM |
| 27 | राजकोट | 7:01 PM |
| 28 | मैसूर | 6:31 PM |
| 29 | कोयंबटूर | 6:24 PM |
| 30 | मदुरै | 6:21 PM |
| 31 | तिरुवनंतपुरम | 6:27 PM |
| 32 | विशाखापट्टनम | 6:13 PM |
गोधूलि मुहूर्त और सायं संध्या का महत्व
इस दिन का गोधूलि मुहूर्त शाम 6:46 बजे से 7:08 बजे तक रहेगा। गोधूलि काल वह समय होता है जब सूर्य अस्त होने के करीब होता है और वातावरण में एक अलग प्रकार की शांति और सकारात्मक ऊर्जा होती है। मान्यता है कि इस समय किया गया पूजन विशेष फलदायी होता है। वहीं, सायं संध्या का समय 6:47 बजे से 7:54 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान सूर्य, भगवान शिव और अन्य देवताओं की पूजा, दीपदान और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। यह समय दिन और रात के मिलन का होता है, इसलिए इसे आध्यात्मिक रूप से बहुत प्रभावशाली माना जाता है।
संध्या पूजन कैसे करें?
इस दिन संध्या के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान पर दीपक जलाएं। सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान शिव का जल से अभिषेक करें। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और आरती करें। जो लोग व्रत रखते हैं, उनके लिए यह समय विशेष फलदायी होता है।
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