आज सूर्यास्त कब होगा 13 फरवरी 2026, आज एकादशी कितने बजे तक है, आज विजया एकादशी 2026 का व्रत कब तक रहेगा
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Feb 13, 2026, 04:19 PM IST
Aaj Suryast kab hoga 13 February 2026 (Ekadashi End Time Today), आज एकादशी कितने बजे तक है: आज 13 फरवरी 2026 को सुबह सूरज फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की ग्यारस में निकला था, जिसके चलते आज विजया एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। आज शुक्रवार है तो इस नाते आज की शाम श्री हरि के साथ लक्ष्मी जी का पूजन भी फलदायी रहेगा। इसलिए आज का सूर्यास्त समय और चंद्रोदय समय जानना जरूरी है। जानें अपने शहर का यह समय। साथ ही जानें क्या आज 13 फरवरी 2026 को होगा एकादशी का पारण।
Aaj Suryast kab hoga time (आज एकादशी कितने बजे तक है) (Pic: AI Image TNN)
Aaj Suryast kab hoga 13 February 2026 (Ekadashi End Time Today): आज 13 फरवरी 2026, शुक्रवार का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की ग्यारस तिथि पर आज विजया एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में विजय प्राप्त होती है। सुबह सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालुओं ने व्रत और पूजा का संकल्प लिया। अब दिन ढलने के साथ सभी की नजर सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय पर है, क्योंकि शाम की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। यहां जानें सिटीवाइज टाइम।
Aaj Suryast kab hoga time (आज एकादशी कितने बजे तक है)
आज अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त का समय थोड़ा-बहुत भिन्न रहेगा। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सूर्यास्त लगभग शाम 6:05 बजे के आसपास होगा। लखनऊ में सूर्यास्त करीब 5:55 बजे और वाराणसी में लगभग 5:50 बजे के आसपास होने की संभावना है। इसी समय के आसपास चंद्रोदय भी होगा, जो व्रत रखने वालों के लिए विशेष महत्व रखता है।
आज 13 फरवरी 2026 को सूर्यास्त का समय (Aaj Ekadashi kab tak hai)
| शहर / City | सूर्यास्त (Sunset) | रात्रि चंद्र दर्शन (Sunset के बाद) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 6:03 PM | 10:30–10:45 PM |
| नोएडा | 6:03 PM | 10:30–10:45 PM |
| गाजियाबाद | 6:02 PM | 10:30–10:45 PM |
| फरीदाबाद | 6:03 PM | 10:30–10:45 PM |
| गुरुग्राम | 6:03 PM | 10:30–10:45 PM |
| मेरठ | 6:01 PM | 10:30–10:45 PM |
| हापुड़ | 6:01 PM | 10:30–10:45 PM |
| पानीपत | 6:02 PM | 10:30–10:45 PM |
| लखनऊ | 5:50 PM | 10:15–10:30 PM |
| आगरा | 6:02 PM | 10:25–10:40 PM |
| कानपुर | 5:58 PM | 10:20–10:35 PM |
| जयपुर | 6:05 PM | 10:25–10:40 PM |
| पटना | 5:50 PM | 10:15–10:30 PM |
| चंडीगढ़ | 6:04 PM | 10:30–10:45 PM |
| भोपाल | 6:15 PM | 10:25–10:40 PM |
| इंदौर | 6:16 PM | 10:30–10:45 PM |
| मुंबई | 6:33 PM | 10:40–10:55 PM |
| पुणे | 6:32 PM | 10:40–10:55 PM |
| अहमदाबाद | 6:30 PM | 10:30–10:45 PM |
| सूरत | 6:31 PM | 10:30–10:45 PM |
| वडोदरा | 6:30 PM | 10:30–10:45 PM |
| कोलकाता | 5:40 PM | 10:00–10:15 PM |
| चेन्नई | 6:20 PM | 10:25–10:40 PM |
| बेंगलुरु | 6:35 PM | 10:30–10:45 PM |
| हैदराबाद | 6:25 PM | 10:30–10:45 PM |
| रायपुर | 6:20 PM | 10:25–10:40 PM |
| भुवनेश्वर | 5:40 PM | 10:15–10:30 PM |
| गुवाहाटी | 5:28 PM | 9:50–10:10 PM |
| वाराणसी | 5:48 PM | 10:10–10:25 PM |
| प्रयागराज | 5:50 PM | 10:15–10:30 PM |
| कोच्चि (कोची) | 6:35 PM | 10:30–10:45 PM |
| तिरुवनंतपुरम | 6:35 PM | 10:30–10:45 PM |
| गोवा | 6:35 PM | 10:40–10:55 PM |
| उदयपुर | 6:05 PM | 10:25–10:40 PM |
क्या आज 13 फरवरी 2026 को होगा एकादशी का पारण
आज 13 फरवरी 2026 को एकादशी तिथि का समापन दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर होगा। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। हालांकि व्रत रखने वाले श्रद्धालु पारण द्वादशी तिथि में ही करते हैं। विजया एकादशी व्रत का पारण 14 फरवरी 2026 को सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक किया जाएगा। पारण का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सही मुहूर्त में व्रत खोलने से ही व्रत का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। पारण के समय भगवान विष्णु को फल, तुलसी पत्र और सात्विक भोजन अर्पित कर स्वयं भी सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए।
आज 13 फरवरी 2026 को संध्या के समय क्या करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से विशेष फल मिलता है। चूंकि आज शुक्रवार भी है, इसलिए श्री हरि के साथ माता लक्ष्मी का पूजन करना और भी फलदायी रहेगा। संध्या के समय दीप जलाकर, विष्णु सहस्रनाम या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है।
आज के दिन संयम, सकारात्मक विचार और सेवा-भाव रखना भी उतना ही जरूरी है जितना पूजा-पाठ। मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत श्रीराम ने भी लंका विजय से पहले किया था, जिससे उन्हें सफलता प्राप्त हुई। इसलिए इस व्रत को विजय और सफलता का प्रतीक माना जाता है। संध्या समय जब सूर्य अस्त होगा, तब दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। मन में श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है।
