अध्यात्म

लाभ पंचमी और खरना आज, पंचांग से जानिए 26 अक्टूबर के दिन का शुभ और अशुभ काल

26 October Ka Panchang: 26 अक्टूबर को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। इस कारण लाभ पंचमी का पर्व भी आज मनाया जा रहा है। लाभ पंचमी के दिन से ही व्यापारी नए बही खाते की शुरुआत करते हैं। इसके साथ ही छठ पूजा का दूसरा दिन भी आज है। आइए जानते हैं कि आज के दिन का शुभ और अशुभ काल का समय क्या है।

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26 अक्टूबर का पंचांग

26 October Ka Panchang: 26 अक्टूबर 2025, रविवार का दिन, हिंदू पंचांग के अनुसार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जो पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों के लिए अनुकूल है। इसके साथ ही छठ पूजा का दूसरा दिन है। इस दिन खरना है। जिसमें व्रत रखने वाली महिलाएं 36 घंटे का निर्जला उपवास रखेंगी। खरना का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। इसके बाद सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य और मंगलवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। खरना का प्रसाद व्रती को उपवास के लिए तैयार करते हैं।

सूर्य और चंद्र का समय

सूर्य आज सुबह 6:29 बजे उदय होगा और शाम 5:41 बजे अस्त होगा। चंद्रमा सुबह 10:44 बजे उदय होगा और रात 8:48 बजे अस्त होगा। दिन की अवधि 11 घंटे 11 मिनट 57 सेकंड रहेगी, जबकि रात की अवधि 12 घंटे 48 मिनट 43 सेकंड रहेगी। मध्याह्न दोपहर 12:05 बजे होगा।

तिथि, नक्षत्र, योग और करण

आज की तिथि शुक्ल पंचमी है, जो सुबह 6:04 बजे, 27 अक्टूबर तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल षष्ठी शुरू होगी। नक्षत्र ज्येष्ठा पूरे दिन प्रभावी रहेगा, जो सुबह 10:46 बजे तक रहेगा, फिर मूल नक्षत्र शुरू होगा। ज्येष्ठा नक्षत्र का चौथा पाद सुबह 10:46 बजे तक, मूल नक्षत्र का पहला पाद दोपहर 5:28 बजे तक, दूसरा पाद रात 12:09 बजे, 27 अक्टूबर तक और तीसरा पाद प्रभावी रहेगा। योग में शोभन योग सुबह 6:46 बजे तक रहेगा, इसके बाद अतिगण्ड योग शुरू होगा। करण में बव दोपहर 4:58 बजे तक रहेगा, फिर बालव सुबह 6:04 बजे, 27 अक्टूबर तक और इसके बाद कौलव करण दिन की समाप्ति तक रहेगा।

चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर

आज विक्रम संवत 2082 कालयुक्त है, शक संवत 1947 विश्वावसु है और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त है, जो 25 अप्रैल 2025 को दोपहर 3:07 बजे तक रहेगा, फिर सिद्धार्थी शुरू होगा। चंद्र मास कार्तिक है, जो पूर्णिमांत और अमांत दोनों में गणना होता है। प्रविष्टे/गते 10 है।

राशि और नक्षत्र

चंद्र राशि वृश्चिक में सुबह 10:46 बजे तक रहेगी, इसके बाद धनु में प्रवेश करेगी। सूर्य राशि तुला में है और सूर्य स्वाती नक्षत्र के पहले पाद में है। ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव संतुलन और महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित करेगा, लेकिन मूल नक्षत्र में जल्दबाजी से बचना होगा।

ऋतु और अयन

ऋतु शरद है, जो द्रिक और वैदिक दोनों गणनाओं में लागू है। अयन दक्षिणायन है, जो सूर्य की दक्षिणी गति को दर्शाता है। यह मौसम सुखद रहेगा, लेकिन रात में ठंडक बढ़ सकती है।

26 अक्टूबर के दिन का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:47 बजे से 5:38 बजे तक, ध्यान और पूजा के लिए उत्तम।
  • प्रातः संध्या: सुबह 5:12 बजे से 6:29 बजे तक, आध्यात्मिक कार्यों के लिए शुभ।
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक, महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:57 बजे से 2:42 बजे तक, नए कार्य शुरू करने के लिए अच्छा।
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:41 बजे से 6:06 बजे तक, पूजा और परिवार के लिए शुभ।
  • सायाह्न संध्या: शाम 5:41 बजे से 6:58 बजे तक, भक्ति कार्यों के लिए उपयुक्त।
  • अमृत काल: सुबह 6:20 बजे, 27 अक्टूबर से 8:07 बजे, 27 अक्टूबर तक, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:40 बजे से 12:31 बजे, 27 अक्टूबर तक, रात्रिकालीन पूजा के लिए अच्छा।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 10:46 बजे से सुबह 6:30 बजे, 27 अक्टूबर तक, सभी कार्यों में सफलता।
  • रवि योग: सुबह 6:29 बजे से 10:46 बजे तक, सूर्य से संबंधित कार्यों के लिए शुभ।

26 अक्टूबर के दिन काअशुभ समय

  • राहुकाल: दोपहर 4:17 बजे से शाम 5:41 बजे तक, इस दौरान बड़े फैसले या नए काम शुरू करने से बचें।
  • यमगण्ड: दोपहर 12:05 बजे से 1:29 बजे तक, जोखिम भरे कार्यों के लिए ठीक नहीं।
  • गुलिक काल: दोपहर 2:53 बजे से 4:17 बजे तक, सावधानी बरतें।
  • दुर्मुहूर्त: दोपहर 4:11 बजे से 4:56 बजे तक, कार्य शुरू करने से बचें।
  • वर्ज्य: रात 7:40 बजे से 9:27 बजे तक, शुभ कार्यों से बचें।
  • विंछुड़ो: सुबह 6:29 बजे से 10:46 बजे तक, अशुभ माना जाता है।
  • गण्ड मूल: पूरे दिन।

आनंदादि और तमिल योग

आनंदादि योग में काण सुबह 10:46 बजे तक रहेगा, जो अशुभ है, इसके बाद सिद्धि योग शुरू होगा। तमिल योग में मरण सुबह 10:46 बजे तक रहेगा, इसके बाद अमृत योग शुरू होगा। जीवनम में अर्ध जीवन और नेत्रम में नेत्रहीन रहेगा।

निवास और शूल

होमाहुति बुध को दी जाएगी। दिशा शूल पश्चिम दिशा में है, इस दिशा में यात्रा से बचें। चंद्र वास उत्तर में सुबह 10:46 बजे तक रहेगा, फिर पूर्व में। अग्निवास पृथ्वी पर सुबह 6:04 बजे, 27 अक्टूबर तक रहेगा, फिर आकाश में। राहु वास उत्तर में रहेगा। शिववास कैलाश पर सुबह 6:04 बजे, 27 अक्टूबर तक रहेगा, फिर नंदी पर। कुंभ चक्र पूर्व में है, जो अशुभ माना जाता है। बाण रोग दोपहर 2:59 बजे तक रहेगा।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारी author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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