Aaj ka iftar ka Time kya hai, आज इफ्तार कितने बजे है 6 March 2026 (Aaj Roja Iftar Kitne Baje hai, 16th day of Ramazan Month): रमजान का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और आत्मसंयम का महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में रोजेदार सेहरी के साथ रोजा शुरू करते हैं और सूर्यास्त के बाद इफ्तार करके रोजा खोलते हैं। साल 2026 में रमजान की शुरुआत 19 फरवरी से हुई थी, इसलिए आज यानी 6 मार्च 2026 को रमजान का 16वां रोजा रखा जा रहा है।
इस्लाम में रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह इंसान को आत्मसंयम, अनुशासन और अल्लाह की इबादत के करीब ले जाने का माध्यम भी माना जाता है। रोजेदार दिनभर रोजा रखने के बाद सूर्यास्त के समय इफ्तार करते हैं। आज दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सूर्यास्त लगभग शाम 6 बजकर 24 मिनट पर होगा, इसलिए इफ्तार का समय इसी के बाद माना जाएगा। आइए जानते हैं कि आज 6 मार्च 2026 को भारत के प्रमुख शहरों में इफ्तार का समय क्या रहेगा।
आज 6 मार्च 2026 को विभिन्न शहरों के अनुसार इफ्तार का समय
| शहर | आज का इफ्तार समय (अनुमानित) |
|---|---|
| दिल्ली | शाम 6:24 के बाद |
| नोएडा | शाम 6:24 के बाद |
| लखनऊ | शाम 6:10 के बाद |
| कानपुर | शाम 6:12 के बाद |
| जयपुर | शाम 6:27 के बाद |
| भोपाल | शाम 6:31 के बाद |
| पटना | शाम 5:57 के बाद |
| कोलकाता | शाम 5:53 के बाद |
| हैदराबाद | शाम 6:29 के बाद |
| चेन्नई | शाम 6:20 के बाद |
| बेंगलुरु | शाम 6:28 के बाद |
| मुंबई | शाम 6:45 के बाद |
| अहमदाबाद | शाम 6:38 के बाद |
| सूरत | शाम 6:40 के बाद |
| श्रीनगर | शाम 6:32 के बाद |
रोजा कब खोला जाता है?
इस्लामिक परंपरा के अनुसार रोजा फज्र की नमाज के समय से शुरू होकर मगरिब की नमाज के समय तक रखा जाता है। सूरज ढलते ही मगरिब का वक्त शुरू होता है और उसी समय रोजेदार इफ्तार करते हैं।
आमतौर पर इफ्तार सूर्यास्त के तुरंत बाद किया जाता है। पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत के अनुसार रोजा खजूर या पानी से खोलना बेहतर माना जाता है। इसके बाद मगरिब की नमाज अदा की जाती है और फिर भोजन किया जाता है।
रमजान में इफ्तार का महत्व
रमजान में इफ्तार का समय आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे दिन रोजा रखने के बाद जब रोजेदार इफ्तार करते हैं तो उस समय दुआ कबूल होने की भी विशेष मान्यता है।
हदीसों में बताया गया है कि रोजेदार की दुआ इफ्तार के समय विशेष रूप से स्वीकार होती है। इसलिए मुसलमान इस समय अल्लाह से अपने लिए, अपने परिवार और पूरी दुनिया के लिए भलाई की दुआ करते हैं।
इफ्तार कैसे करना चाहिए?
इफ्तार करते समय कुछ सुन्नत तरीकों का पालन करना बेहतर माना जाता है।
सबसे पहले रोजेदार यह दुआ पढ़ सकते हैं। 'अल्लाहुम्मा लका सुम्तु वा अला रिज्किका अफ्तर्तु।'
इसका अर्थ है — 'ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा और तेरी ही दी हुई रोजी से इफ्तार कर रहा हूं।'
इफ्तार आमतौर पर खजूर और पानी से शुरू किया जाता है। इसके बाद हल्का भोजन जैसे फल, दही, सूप या खिचड़ी लेना बेहतर माना जाता है। बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन तुरंत खाना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता।
16वें रोजे का आध्यात्मिक महत्व
रमजान का मध्य समय आध्यात्मिक रूप से बहुत अहम माना जाता है। इस समय तक रोजेदार रोजा रखने की आदत में पूरी तरह ढल चुके होते हैं और इबादत में ज्यादा ध्यान लगाने लगते हैं।
इस दौरान लोग कुरआन की तिलावत, नमाज, दुआ और दान-पुण्य के कामों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। माना जाता है कि रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
