अध्यात्म

Aaj Kaun Sa Roza Hai: पांचवां रोजा आज, जानिए क्यों खास माना जाता है पांचवां, इस दिन कैसे करें अल्लाह की इबादत?

Aaj 23 February 2026 Kaun Sa Roza Hai: बीती 19 फरवरी से पाक माह रमजान की शुरुआत हो गई थी। इस माह में मुसलान रोजे रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। आज 23 फरवरी है, ऐसे में आज के दिन पांचवां रोजा रखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि पांचवां रोजा क्यों खास माना जाता है?

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आज कौन सा रोजा रखा जाएगा?

Aaj 23 February 2026 Kaun Sa Roza Hai: रमजान का पाक महीना इंसान को सिर्फ भूख और प्यास सहने का सबक नहीं देता, बल्कि यह अपने अंदर सुधार लाने, सब्र सीखने और अल्लाह से गहरा रिश्ता बनाने का मौका देता है। 23 फरवरी 2026 को रमजान का पांचवां रोजा रखा जा रहा है। रमजान के शुरुआती दिनों में इंसान एक नए रूटीन में ढलता है और पांचवें रोजे तक पहुंचते-पहुंचते उसके अंदर इबादत की लय बनने लगती है, इसलिए यह दिन खास माना जाता है।

रमजान के पहले दस दिन रहमत के होते हैं। इस दौरान बंदा अल्लाह की रहमत की उम्मीद के साथ ज्यादा से ज्यादा नेक काम करने की कोशिश करता है। पांचवां रोजा इसी पहले अशरे के बीच आता है, इसलिए यह अपने इरादों को मजबूत करने और इबादत में स्थिरता लाने का अहम मौका होता है। अगर किसी से शुरुआती दिनों में कोताही हुई हो तो वह इस दिन से खुद को बेहतर बनाने की नई शुरुआत कर सकता है।

आज कौन सा रोजा है?

रमज़ान 1447 हिजरी के मुताबिक 23 फरवरी 2026 को पांचवां रोज़ा रखा जा रहा है। इस साल रमज़ान की शुरुआत के हिसाब से 19 फरवरी को पहला रोज़ा रखा गया था, इसलिए 23 फरवरी को पांचवां रोज़ा बनता है। रमज़ान का हर रोज़ा अपने आप में अहम होता है और पांचवां रोज़ा पहले अशरे यानी रहमत के दिनों के बीच आता है।

पांचवां रोजा क्यों खास माना जाता है?

इस्लाम में रोजा हर बालिग मुसलमान पर फर्ज है। रोजा सूर्योदय से पहले से लेकर सूर्यास्त तक खाने-पीने और कई अन्य चीजों से रुकने का नाम है, लेकिन इसका असली मकसद तकवा यानी परहेजगारी और अल्लाह का डर दिल में पैदा करना है। पांचवां रोजा इस बात की याद दिलाता है कि रोजा सिर्फ शरीर का नहीं, बल्कि आंख, कान, जुबान और दिल का भी होना चाहिए।

धार्मिक मान्यता के अनुसार रमजान का हर रोजा अपने आप में खास है। पांचवें रोजे को दुआ का दरख्त भी कहा जाता है, यानी ऐसा दिन जब की गई सच्चे दिल की दुआएं कबूल होने की उम्मीद और बढ़ जाती है। यह दिन इंसान को सिखाता है कि वह अपने रब के सामने झुके, अपनी गलतियों को माने और सुधार की राह अपनाए।

कुरआन की सूरा काफिरून की आखिरी आयत में कहा गया है, ‘लकुम दीनोकुम वलिय दीन’, यानी तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन और मेरे लिए मेरा दीन। यह आयत इस बात की तरफ इशारा करती है कि हर व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार चलने की आजादी है। इस्लाम में रोजा उसी इबादत का अहम हिस्सा है जो इंसान को अपने रब से जोड़ता है।

पांचवें रोजे में अल्लाह की इबादत कैसे करें?

इस दिन की शुरुआत सही नियत से करें। सेहरी के वक्त उठकर दिल से दुआ करें कि अल्लाह आपका रोजा कबूल करे और पूरे रमजान में इबादत की तौफीक दे। फज्र की नमाज पाबंदी से अदा करें और कोशिश करें कि नमाज समय पर पढ़ी जाए।

कुरआन की तिलावत रमजान में बहुत अहम मानी जाती है। पांचवें रोजे के दिन कम से कम कुछ आयतों का अर्थ समझकर पढ़ने की कोशिश करें। सिर्फ पढ़ना ही नहीं, बल्कि उसके संदेश को अपनी जिंदगी में उतारने की नीयत रखें। इससे दिल को सुकून मिलता है और ईमान मजबूत होता है।

इस दिन सब्र का खास ध्यान रखें। रोजा हमें सिखाता है कि गुस्से से बचें, गलत बात का जवाब गलत तरीके से न दें और जुबान को बुराई से रोकें। अगर कोई झगड़ा करे तो रोजेदार को चाहिए कि वह कहे कि वह रोजे से है और खुद को कंट्रोल करे।

दान और मदद भी पांचवें रोजे की खास इबादत हो सकती है। जरूरतमंदों की मदद करना, किसी को खाना खिलाना या छोटी-सी सहायता देना भी बड़ा सवाब दिला सकता है। रमजान में नेक कामों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है, इसलिए इस मौके को हाथ से जाने न दें।

रोजा कब से कब तक रखा जाता है?

रोज़ा सेहरी से इफ्तार तक रखा जाता है। सेहरी वह समय होता है जब फज्र की नमाज़ से पहले तक खाना-पीना जायज़ होता है। जैसे ही फज्र की अज़ान होती है, रोज़ा शुरू हो जाता है और फिर पूरे दिन खाने-पीने से परहेज़ किया जाता है।

रोज़ा सूरज ढलने तक यानी मगरिब की अज़ान तक रखा जाता है। जैसे ही सूर्यास्त होता है और मगरिब की अज़ान दी जाती है, रोज़ा खोला जाता है, जिसे इफ्तार कहा जाता है।

23 फरवरी 2026: सहरी और इफ्तार का समय

सेहरी का समय: सुबह 05:14 बजे

फज्र की नमाज़: सुबह 05:16 बजे

इफ्तार का समय: शाम 06:30 बजे

इस दिन सूर्योदय सुबह 06:52 बजे है, इसलिए फज्र का समय उससे पहले आता है। सेहरी फज्र से पहले खत्म कर लेनी चाहिए। फज्र की अज़ान के साथ रोज़ा शुरू हो जाता है।

आज रोजा कब तक रहेगा?

23 फरवरी 2026 का रोज़ा सुबह फज्र (05:16 बजे) से शुरू होकर शाम के सूर्यास्त यानी 06:30 बजे तक रहेगा। पूरे दिन खाने-पीने और अन्य रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों से दूर रहना जरूरी है।

अगर शिया फिक़ह के अनुसार समय देखा जाए तो इफ्तार आम तौर पर सूर्यास्त के कुछ मिनट बाद किया जाता है, जबकि सुन्नी मत में मगरिब की अज़ान के साथ ही रोज़ा खोला जाता है। इसलिए स्थानीय मस्जिद या अपने मान्य धार्मिक टाइमटेबल के अनुसार समय की पुष्टि कर लेना बेहतर रहता है। इस तरह 23 फरवरी 2026 को पांचवां रोज़ा सुबह फज्र से लेकर शाम मगरिब तक पूरा किया जाएगा।

रमजान का हर दिन है कीमती

पांचवां रोजा इंसान को अपने अंदर झांकने का मौका देता है। यह सोचने का दिन है कि क्या हम सिर्फ भूखे रह रहे हैं या सच में अपने अंदर बदलाव ला रहे हैं। तकवा, सच्चाई, सब्र और साफ नीयत रोजे की असली रूह है। अगर ये चीजें जिंदगी में आ जाएं तो रोजा कामयाब माना जाता है।

रमजान का हर दिन कीमती है, लेकिन पांचवां रोजा इस सफर का एक मजबूत पड़ाव है। इस दिन ज्यादा से ज्यादा दुआ करें, नमाज की पाबंदी करें, कुरआन पढ़ें और अपने व्यवहार को बेहतर बनाएं। अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगें और आगे की जिंदगी नेक रास्ते पर चलाने की दुआ करें। यही पांचवें रोजे की असली खासियत है और यही इसकी सबसे बड़ी बरकत है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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