अध्यात्म

Holi 2026: किस त्योहार के 40 दिन बाद होली आती है, 3 या 4 मार्च 2026 में से होली कब है

कौन से त्योहार के 40 दिन बाद होली आती है (Holi 2026 mein kab hai): जनवरी महीने में आने वाला एक त्योहार होली का इंतजार बढ़ा देता है। दरअसल इस त्योहार के ठीक 40 दिन बाद ही होली का त्योहार आता है। यहां जानें कि होली 2026 में कब है, 3 या 4 मार्च में से होली की सही डेट क्या है।

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कौन से त्योहार के 40 दिन बाद होली आती है

कौन से त्योहार के 40 दिन बाद होली आती है (Holi 2026 mein kab hai): भारतीय परंपरा में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि होली से 40 दिन पहले कौन-सा पर्व आता है या फिर यह कहा जाता है कि फलां त्योहार के 40 दिन बाद होली आती है। खासतौर पर माघ, बसंत पंचमी और माघ पूर्णिमा को लेकर यह जिज्ञासा अधिक रहती है। लोक परंपरा और ब्रज संस्कृति में इसका एक स्पष्ट उत्तर मिलता है। यहां जानें कि कौन से त्योहार के 40 दिन बाद होली का त्योहार मनाया जाता है।

कौन से त्योहार के 40 दिन बाद होली आती है

सांस्कृतिक रूप से ब्रज क्षेत्र में होली की गणना बसंत पंचमी से भी की जाती है। बसंत पंचमी के दिन से ही मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में 40 दिनों तक चलने वाला होली उत्सव शुरू हो जाता है। मंदिरों में गुलाल उड़ने लगता है और इसे होली के औपचारिक शुभारंभ के रूप में माना जाता है। इस तरह बसंत पंचमी के 40 दिन के बाद होली मनाई जाती है।

3 या 4 मार्च में से होली 2026 कब है

होली 2026 में 4 मार्च (बुधवार) को मनाई जाएगी। होलिका दहन 3 मार्च 2026 की रात होगा और अगले दिन धुलंडी/रंगवाली होली 4 मार्च को पड़ेगी।

बसंत पंचमी से शुरू हुआ ब्रज में होली का त्योहार

ब्रज क्षेत्र में होली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि यह लगभग 40 दिनों तक चलने वाला रंगोत्सव है। वर्ष 2026 में यह महोत्सव 23 जनवरी, बसंत पंचमी से शुरू हो गया है। इस दिन मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव के मंदिरों में होली का डांडा गाड़ा जाता है, ठाकुरजी को पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं और भक्त गुलाल और अबीर से एक-दूसरे को रंगने लगते हैं।

ब्रज की होली का यह प्रारंभिक दिन न केवल रंगों का उत्सव है, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। बसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा का दिन माना जाता है और इसी दिन रंगोत्सव की शुरुआत करके जीवन में उल्लास और भक्ति का संदेश दिया जाता है।

इस महोत्सव के दौरान ब्रज के विभिन्न स्थलों पर अलग-अलग परंपराएं मनाई जाती हैं। बरसाना और नंदगांव में लट्ठमार होली, वृंदावन में फूलों की होली, गोकुल में छड़ी-मार होली जैसी परंपराएं देखने को मिलती हैं। यह 40-दिवसीय महोत्सव कृष्ण और राधा की लीलाओं, भक्ति गीतों और रंगों से भरे आनंद का प्रतीक है।

ब्रज में बसंत पंचमी से शुरू हुई होली लोगों के दिलों में उत्साह, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद भर देती है। यह केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि भक्ति, लोक संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव है।

होली 2026 पर लगेगा चंद्र ग्रहण

वर्ष 2026 में होली के अवसर पर चंद्र ग्रहण लग रहा है, जोकि एक दुर्लभ खगोलीय घटना है। इस साल 2026 फाल्गुन मास की पूर्णिमा (होलिका दहन) के दिन यानी 03 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत में भी दिखाई देगा और इसका सूतक काल माना जाएगा। यह ग्रहण भारत मानक समय के अनुसार दोपहर लगभग 03:20 बजे शुरू होकर शाम लगभग 06:47 बजे तक चलेगा और इसकी अवधि करीब तीन घंटे 27 मिनट रहेगी। इस वजह से धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उस दिन सूर्योदय से पहले से ही ग्रहण का प्रभाव माना जाता है, और ग्रहण काल में शुभ कार्यों और पूजा‑पाठ से परहेज करने की परंपरा होती है।

चंद्र ग्रहण इस बार होली के उत्सव के आसपास होने के कारण कई लोगों में जिज्ञासा और भ्रम भी उत्पन्न कर रहा है कि क्या होली की तारीख बदलनी चाहिए या नहीं। ज्योतिषों के अनुसार यह ग्रहण होलिका दहन के दिन ही लगेगा, इसलिए इसका धार्मिक महत्व बढ़ जाता है और प्राचीन परंपरा के अनुसार सूतक काल का पालन आवश्यक माना जाता है। हालांकि ग्रहण के कारण होलिका दहन और होली के समय में थोड़ा सा संयोजन और सावधानी की सलाह दी जाती है, पर मूल रूप से होली का रंग‑भरा पर्व 4 मार्च 2026 को ही मनाया जाएगा।

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मेधा चावला
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

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