22 अक्टूबर 2025 गोवर्धन पूजा का पंचांग
22 October Ka Panchang: आज की तिथि प्रतिपदा है, जो शाम 8:16 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी। नक्षत्र स्वाती पूरे दिन प्रभावी रहेगा, जो रात 1:52 बजे (23 अक्टूबर) तक रहेगा, फिर विशाखा नक्षत्र शुरू होगा। स्वाती नक्षत्र के चारों पद आज के दिन को प्रभावित करेंगे। दूसरा पद दोपहर 12:24 बजे तक, तीसरा पद शाम 7:07 बजे तक, और चौथा पद रात 1:52 बजे तक रहेगी।
योग में प्रीति योग रात 4:06 बजे (23 अक्टूबर) तक रहेगा, इसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। करण में किंस्तुघ्न सुबह 7:04 बजे तक रहेगा, फिर बव करण शाम 8:16 बजे तक, और इसके बाद बालव करण दिन की समाप्ति तक रहेगा। ग्रहों की स्थिति की बात करें तो तुला राशि में मंगल, बुध, सूर्य और चंद्रमा विराजमान हैं। कर्क राशि में देव गुरु बृहस्पति और सिंह में केतु विराजित हैं। शुक्र कन्या राशि में हैं। मायावी राहु कुंभ और शनि मीन में विराजमान हैं।
सूर्य आज सुबह 6:26 बजे उदय होगा और शाम 5:44 बजे अस्त होगा। चंद्रमा सुबह 7:01 बजे उदय होगा और शाम 6:00 बजे अस्त होगा। दिन की अवधि 11 घंटे 18 मिनट 14 सेकंड रहेगी, जबकि रात की अवधि 12 घंटे 42 मिनट 24 सेकंड होगी। मध्याह्न दोपहर 12:05 बजे होगा।
चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर
आज विक्रम संवत 2082 कालयुक्त है, शक संवत 1947 विश्वावसु है, और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त है, जो 25 अप्रैल 2025 को दोपहर 3:07 बजे तक रहेगा, फिर सिद्धार्थी शुरू होगा। चंद्र मास कार्तिक है, जो पूर्णिमांत और अमांत दोनों में गणना होता है। प्रविष्टे/गते 6 है।
राशि और नक्षत्र
चंद्र राशि और सूर्य राशि दोनों तुला में हैं। सूर्य चित्रा नक्षत्र के चौथे पाद में है। स्वाती नक्षत्र का प्रभाव पूरे दिन रहेगा, जो रचनात्मकता और संतुलन को बढ़ाता है, लेकिन जल्दबाजी से बचना होगा।
ऋतु और अयन
ऋतु शरद है, जो द्रिक और वैदिक दोनों गणनाओं में लागू है। अयन दक्षिणायन है, जो सूर्य की दक्षिणी गति को दर्शाता है। यह मौसम सुखद रहेगा, लेकिन शाम को ठंड बढ़ सकती है।
गोवर्धन पूजा के दिन का शुभकाल
आनंदादि योग में धुम्र रात 1:52 बजे (23 अक्टूबर) तक रहेगा, जो अशुभ है, इसके बाद धाता/प्रजापति योग शुरू होगा, जो शुभ है। तमिल योग में मरण रात 1:52 बजे तक रहेगा, फिर सिद्ध योग शुरू होगा। जीवनम में निर्जीव रात 1:52 बजे तक रहेगा, और नेत्रम में नेत्रहीन रहेगा। अर्ध जीवन का प्रभाव भी रहेगा।
निवास और शूल
होमाहुति सूर्य को दी जाएगी। दिशा शूल उत्तर दिशा में है, इसलिए इस दिशा में यात्रा से बचें। अग्निवास पाताल में शाम 8:16 बजे तक रहेगा, फिर पृथ्वी पर होगा। चंद्र वास पश्चिम में और राहु वास दक्षिण-पश्चिम में रहेगा। शिववास श्मशान में शाम 8:16 बजे तक रहेगा, फिर गौरी के साथ होगा। कुम्भ चक्र पूर्व में है, जो अशुभ माना जाता है।
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