15 July 2024 Panchang: आज आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं। इसके अलावा आज सोमवार व्रत भी है। ऐसे में आज शिवलिंग पर जल जरूर चढ़ाएं। चंद्र देव पूरे दिन शुक्र की राशि तुला में विराजमान रहेंगे। जानिए आज के सभी शुभ मुहूर्त, राहुकाल और विशेष उपाय।
15 जुलाई 2024 पंचांग
संवत---पिङ्गला विक्रम संवत 2081 माह-आषाढ़ ,शुक्ल पक्ष
तिथि-- नवमी07:20 pm तक फिर दशमी
व्रत- गुप्त नवरात्रि व्रत
दिवस-सोमवार
सूर्योदय-05:23am
सूर्यास्त-07:20pm
नक्षत्र- स्वाती
चन्द्र राशि- तुला,स्वामीग्रह -शुक्र
सूर्य राशि- मिथुन ,स्वामी -बुध
करण- बालव06:25am फिर कौलव
योग- सिद्ध07am तक फिर साध्य
15 जुलाई 2024 शुभ मुहूर्त
अभिजीत-11:58am से 12:47 pm
विजय मुहूर्त-02:24pm से 03:24 pm तक
गोधुली मुहूर्त--06:31 pm से 07:25 pm तक
ब्रम्ह मुहूर्त-4:15am से 05:08am तक
अमृत काल-06:08am से 07:56am तक
निशीथ काल मुहूर्त-रात्रि 11:52 से 12:41 तक रात
संध्या पूजन-06:35 pm से 07:30pm तक
दिशा शूल-पूर्व दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त--राहुकाल -सायंकाल बजे से 04:30 बजे से 06 बजे तक
क्या करें- शक्ति पर्व गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि का पावन व्रत रहें। हवन करें। माता जगतजननी दुर्गा को मीठा, पूड़ी लाल पुष्प, लौंग व नारियल अर्पित करें। माता बंगलामुखी जगत माता हैं। वह कल्याण करती हैं। गुप्त नवरात्रि व्रत बहुत ही फलदायी है। धन व यश प्राप्ति के लिए माता बंगलामुखी जी की उपासना बहुत उत्तम है। आज सप्त अन्न, फल व वस्त्र के दान का बहुत महत्व है। आज का उपवास निराजल, फलाहार या जैसा आपका स्वास्थ्य हो, वैसा ही होगा। काली मन्दिर में प्रसाद अर्पित करें। बंगलामुखी व प्रत्यंगिरा मंन्त्र व अनुष्ठान का यह बहुत महत्वपूर्ण समय है। माता पीतांबरा का दर्शन करें। किसी भी शिव मंदिर परिसर में पीपल का पेड़ लगाएं। मन्दिर में अखंड श्री रामचरितमानस पाठ भी बहुत महत्व है। शिवपुराण व दुर्गासप्तशती का पाठ करें। काली मन्दिर में भंडारा भी करवा सकते हैं। गो माता को पालक व गुड़ खिलाएं। चिड़ियों को दाना पानी दें। अन्न का दान करें। माता दुर्गा के बत्तीस नाम के जप से कई जन्मों के पापों का शमन होता है। इस समय तांत्रिक पूजाओं का बहुत महत्व है। श्रद्धा व समर्पण पूर्वक माता दुर्गा जी की स्तुति करें। 07:20 रात्रि के बाद या अगले दिन पारण करें।
क्या न करे- स्वस्थ हों तो हो सके अन्न ग्रहण मत करें। लहसुन प्याज मत खाएं। फलाहार रहें।
