मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी पसंदीदा बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल को बनवाया था, और कुतुब मीनार को विजय के प्रतीक के रूप में बनवाया गया था। इसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने हिंदू शासकों को हराने के बाद बनवाना शुरू किया था। कुछ इतिहासकारों का यह भी मानना है कि कुतुब मीनार का निर्माण सूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की याद में किया गया था।
भारत के ऐतिहासिक इमारतों और प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में कुतुब मीनार और ताजमहल का नाम शुमार है। कुतुब मीनार दिल्ली में स्थित है, और इसे बनवाने की शुरुआत कुतुबुद्दीन-ऐबक ने की थी, और इसे पूरा करने का काम उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने किया था।
कुतुब मीनार को 1193 ईस्वी से बनाना शुरू किया गया था और यह पूरी तरह 1220 ईस्वी तक बनकर तैयार हो गया था। 1368 ईस्वी में फिरोज शाह तुगलक ने कुतुब मीनार की ऊपरी मंजिलों का पुनर्निर्माण करवाया और उसमें एक और मंजिल जोड़ दी।
वहीं, दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहां ने बनवाया था। ताजमहल आगरा में स्थित है और इसकी खूबसूरती को देखने के लिए हर साल करोड़ों पर्यटक पूरी दुनिया भर से आते हैं।
इसे 1632 ईस्वी में बनवाया गया था। यूं तो ताजमहल की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। आज तक ऐसा अजूबा ना कभी बना और ना ही कभी बनेगा। ताजमहल को शाहजहां ने अपनी पसंदीदा पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था।
मुमताज महल का मकबरा भी इसी ताजमहल के अंदर है। ताजमहल को बनाने वाले आर्किटेक्ट का नाम उस्ताद अहमद लाहौरी था। मोहब्बत की यह निशानी आज यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में भी शामिल है।
आप सबने इन दोनों इमारतों को तस्वीरों में, वीडियो में या फिर सचमुच में कभी ना कभी जरूर देखा होगा। ऐसे में आपको इन दोनों इमारतों में से सबसे ऊंचा कुतुब मीनार ही लगा होगा। लेकिन आपका यह भ्रम अब तोड़ने का समय आ गया है।
दरअसल, इन दोनों इमारतों में सबसे ऊंचा ताजमहल है, ना कि कुतुब मीनार। अगर आप इन दोनों इमारतों को एक दूसरे के सामने रखकर देखेंगे तो आपको लगेगा कुतुब मीनार ऊंचा है, लेकिन असल बात तो यह है कि ताजमहल कुतुब मीनार से ऊंचा है।
हालांकि ये अंतर हमें समझ में नहीं आता, लेकिन सच कहें तो ताजमहल की ऊंचाई कुतुब मीनार से महज 2 फीट ज्यादा है। ताजमहल की कुल ऊंचाई 73 मीटर यानी (240 फीट) है, तो वहीं कुतुब मीनार की कुल ऊंचाई 72.5 मीटर यानी (238 फीट) है।