लकड़बग्घे जंगल के वो जानवर हैं, जो झुंड में रहकर शेर का भी शिकार कर लेते हैं। ये हमेशा झुंड में ही रहते हैं। लकड़बग्घों में मादा लकड़बग्घा नर से ज्यादा ताकतवर होती है।
इनके जबड़े इतने ताकतवर होते हैं कि ये हाथी की हड्डी तक चबा सकते हैं। झुंड में ये बड़े-बड़े खतरनाक और शिकारी जानवरों को भी मौत की नींद सुला देते हैं।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि लकड़बग्घे कई बार हंसने की तरह आवाज निकालते हैं लेकिन ऐसा वे क्यों और कब करते हैं? आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।
दरअसल, लकड़बग्घों की हंसी जैसी आवाज सिर्फ एक भ्रम है, वे हंसते नहीं हैं। उनकी यह डरावनी हंसने जैसी आवाज सिर्फ तब निकलती है जब वे किसी जानवर का शिकार कर रहे होते हैं।
या फिर इस आवाज को वे तब निकालते हैं जब वे गहरे दुख या किसी डर और तनाव में रहते हैं। उनकी तेज, टूटी-फूटी और अजीब आवाज हमें बस सुनने में हंसी जैसी लगती है लेकिन वे सच में नहीं हंसते।
ऐसा भी नहीं है कि उनकी ये हंसने जैसी आवाज खुशी में निकलती है बल्कि उनकी ये आवाज उनके डर या तनाव का संकेत देती है।
डर, घबराहट या ज्यादा उत्साह में उनकी यह हंसने जैसी आवाज और भी तेज हो जाती है। लकड़बग्घों की झुंड में आवाज से ही उनका रुतबा तय होता है।
दरअसल, लकड़बग्घों की यह आवाज अचानक और बहुत ही अनजान लगती है इसलिए इंसान इस आवाज से डर जाते हैं। इस आवाज से वे एक-दूसरे से बातें भी करते हैं, जैसे “मैं यहां हूं”, “खतरा पास है” या फिर “शिकार मिल गया है।”