भारत में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। देश के कोने-कोने तक रेल की पटरियों का जाल बिछा हुआ है। जिस पर हर रोज हजारों ट्रेनें दौड़ती हैं और इन ट्रेनों में लाखों-करोड़ों लोग सफर करते हैं।
भारतीय रेलवे पूरे दिन में कई ट्रेनों को संचालित करता है। ऐसे में भारत में कुछ ट्रेनें ऐसी भी होती हैं, जिनका एक ही सफर के दौरान ट्रेन नंबर और नाम दोनों बदल दिए जाते हैं। यह सुनकर आप हैरान जरूर हुए होंगे मगर यह बिल्कुल सच है।
आज हम आपको एक ऐसी ही ट्रेन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका सफर के दौरान ही ट्रेन नंबर और नाम दोनों बदल दिया जाता है। साथ ही यह भी बताएंगे कि आखिर रेलवे ऐसा क्यों करती है?
हम जिस ट्रेन की बात कर रहे हैं, उसका नाम 'श्रम शक्ति एक्सप्रेस' है। कानपुर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली श्रम शक्ति एक्सप्रेस सुबह नई दिल्ली पहुंचने के बाद 'सोगरिया एक्सप्रेस' बन जाती है।
बता दें कि 'श्रम शक्ति एक्सप्रेस' का ट्रेन नंबर 12451/12452 है, वहीं 'सगोरिया एक्सप्रेस' का ट्रेन नंबर 20451/20452 है। जबकि ये दो नहीं बल्कि एक ही ट्रेन है। जिसका नाम और नंबर सफर के दौरान बदल दिया जाता है।
अब आइए यह जान लेते हैं कि आखिर रेलवे इस ट्रेन का नाम और नंबर क्यों बदल देती है और दो अलग-अलग नाम और नंबर से एक ही ट्रेन को क्यों चलाती है। दरअसल, भारतीय रेलवे में कई ऐसी ट्रेनें हैं जो रैक शेयरिंग व्यवस्था के कारण बीच रास्ते में अपना नाम और नंबर दोनों बदल लेती हैं।
रेलवे में रैक शेयरिंग (Rake Sharing) व्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जिसमें ट्रेन के डिब्बों जिसे रैक भी कहते हैं, उसे खाली खड़ा रखने के बजाय, उनका उपयोग अलग-अलग रूटों पर चलने वाली दो या उससे अधिक ट्रेनों के लिए किया जाता है।
मान लीजिए कि एक ट्रेन सुबह अपने गंतव्य पर पहुंच जाती है और उसे वापस शाम या अगले दिन उसी रूट पर जाना है, तो इस बीच वह रैक कई घंटों तक खाली खड़ा रहता है। इस समय की बर्बादी को रोकने के लिए रेलवे उन्हीं डिब्बों (रैक) को किसी दूसरी ट्रेन के रूप में चला देता है।