इस धरती पर कई तरह के जीव-जंतु और जानवर रहते हैं। इस प्रकृति ने हर एक प्राणी को कुछ ना कुछ खास प्रवृति दी है। जो उन्हें पूरी दुनिया से अलग बनाती है। आज हम एक ऐसे ही जानवर के बारे में बात करेंगे। जिसकी अजीबोगरीब प्रवृति लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है और साथ ही उसे दूसरे जानवरों से अलग भी बनाती है।
इस जानवर की सबसे खास बात यह है कि ये पानी में रहते हुए भी पानी में तैर नहीं सकता। फिर भी यह डूबता नहीं और पानी में ही अपनी जिंदगी बिताता है। अब सोचने वाली बात यह है कि बिना तैरे यह पानी में कैसे रह लेता है।
हम जिस जानवर की बात कर रहे हैं, वह दरियाई घोड़ा यानी हिप्पोपोटामस (Hippopotamus) है। जो पानी में बिना तैरे रहता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर वह ऐसा कैसे कर लेता है। तो आइए आपके इस सवाल का भी जवाब हम दे देते हैं।
दरअसल, दरियाई घोड़ा शरीर से इतना भारी होता है कि वह पानी में तैर ही नहीं पाता। ऐसे में वह पानी में तैरने के बजाय नदी या झील की सतह पर चलते हुए या फिर उछलते-कूदते हुए आगे बढ़ता है और अपना रास्ता तय करता है।
बता दें कि हिप्पो की हड्डियां इतनी भारी होती हैं कि वे उसे पानी के अंदर डूबे रहने में उसकी मदद करती हैं। जिससे वे जब चाहते हैं तभी पानी की सतह पर ऊपर आते हैं और फिर से वापस पानी के अंदर डुबकी लगा लेते हैं।
पानी के अंदर दरियाई घोड़े इतने फुर्तीले होते हैं कि वे पानी के सतह पर जब भी चलते हैं तो ऐसा लगता है कि वे पानी के अंदर दौड़ रहे हैं या फिर उड़ रहे हों। पानी के अंदर का उत्प्लावक बल (Buoyant Force) उन्हें उछलने में मदद करता है।
एक दरियाई घोड़ा पानी के अंदर अपनी सांस को 5 मिनट तक रोक सकता है। जिससे वह अंदर ही पानी में आराम से रह पाता है। जब उसे सांस लेनी होती है तो वह हर 5 मिनट बाद पानी की सतह पर आ जाता है। फिर सांस लेकर अंदर चला जाता है।
आपको यह भी जानकर हैरानी होगी कि वह ऐसा सोते वक्त भी कर सकता है। अगर आप उनके शरीर की बनावट को देखें तो आप देखेंगे कि उनके कान, आंखें और नाक बिल्कुल उनके सिर के ऊपरी हिस्से पर मोजूद होते हैं, जिससे वे पानी में डूबे रहने पर भी अपने आस-पास नजर रख सकते हैं और आसानी से सांस ले सकते हैं।