आपने अक्सर हवाई जहाज को उड़ान भरते या फिर उतरते देखा होगा। ऐसे में हमारा ध्यान उसके विशाल पंखों पर या फिर उसके साइज पर टिका होता है। लेकिन जो चीज सबसे ज़्यादा वजन उठाती है, उसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
जी हां, हम बात कर रहे हैं विमान के पहियों की, जो दिखने में छोटे से सामान्य टायर जैसे लगते हैं, लेकिन हकीकत में ये 100 हाथियों के बराबर का वजन उठा लेते हैं। अब सवाल ये है कि आखिर इतने छोटे से टायर को इतना मजबूत कैसे बनाया जाता है। आइए आज हम आपको इसी बारे में बताते हैं।
आमतौर पर एक विमान जब पूरी तरह लोडेड होता है, तो उसका वजन 250 से 300 टन तक होता है। विमान का इतना ज्यादा वजन सीधे एक पहिए पर नहीं पड़ता, वजन लैंडिंग गियर के कई पहियों में बराबर-बराबर बंट जाता है। हर एक पहिए पर लगभग 20–30 टन तक का दबाव पड़ता है, जो कि 10 अफ्रीकी हाथियों के वजन के बराबर है।
बता दें कि विमान के पहिए किसी कार या ट्रक के टायर जैसे नहीं होते। ये पहिए रबर से ही बने होते हैं लेकिन इनमें प्राकृतिक रबर के साथ सिंथेटिक रबर को भी मिलाया जाता है। पहिए के अंदर स्टील और नायलॉन की कई परतें होती हैं।
ये टायर इतने सख्त होते हैं कि अगर आप इन्हें हाथ से दबाएंगे तो ये बिल्कुल भी नहीं दबेंगे। टायर की बनावट ही सबसे बड़ी वजह है कि ये भारी दबाव के बावजूद भी नहीं फटते। इसी कारण टायर ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनते हैं।
विमान के टायर में कोई साधारण हवा नहीं, बल्कि नाइट्रोजन गैस भरी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि नाइट्रोजन तापमान बदलने पर कम फैलती है। साथ ही ये लैंडिंग के समय टायर घिसने की वजह से बहुत गर्म हो जाते हैं और नाइट्रोजन की वजह से आग लगने का खतरा भी कम रहता है।
जब विमान उड़ान के बाद रनवे पर लैंड करता है, तो उसकी स्पीड करीब 250–300 किमी/घंटा तक होती है। लैंडिंग के वक्त विमान के पहिए एक झटके में घूमना शुरू कर देते हैं। रनवे पर अचानक घर्षण से टायर का तापमान 200°C से ज्यादा तक हो सकता है फिर भी ये टायर कभी फेल नहीं होते, क्योंकि इन्हें इसी हालात के लिए टेस्ट किया जाता है।
अब आप ये सोच रहे होंगे कि विमान का एक पहिया कितना दिन चलता होगा। तो आपको बता दें कि एक विमान का टायर औसतन 300–500 लैंडिंग तक चलता है। फिर इसे बदल दिया जाता है। हालांकि कुछ टायरों को रीट्रेड किया जाता है। यानी कि टायर के ऊपरी परत को बदलकर उसे फिर से इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सुरक्षा के लिहाज से समय-समय पर इन्हें बदलना जरूरी होता है।