आपने देखा होगा कि छोटे-बड़े शहरों में कई लोगों के घरों में LPG सिलेंडर की जगह गैस पाइपलाइन का कनेक्शन होता है। इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती। बस एक पाइप के किचन में चौबीसों घंटे गैस पहुंचती है।
मगर क्या आपने कभी यह सोचा है कि पाइपलाइन से आ रही ये गैस हमारे किचन में कैसे और कहां से आती है और इसमें सिलेंडर की जरूरत क्यों नहीं पड़ती। अगर आपको इस बारे में कोई जानकारी नहीं है तो आइए हम आपको इस बारे में बता देते हैं।
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि पाइपलाइन से आने वाली गैस को नैचुरल गैस (Natural Gas) कहते हैं। यह गैस जमीन के काफी नीचे पाई जाती है और इसे खास किस्म के मशीनों और तकनीक की मदद से जमीन के अंदर से निकाला जाता है।
बता दें कि भारत में यह गैस समुद्र के नीचे और कुछ जमीनी इलाकों से निकाली जाती है, जैसे मुंबई हाई, कृष्णा-गोदावरी बेसिन और असम और गुजरात के कुछ क्षेत्र जहां से इस गैस को निकाला जाता है।
जमीन से निकलने के बाद गैस को सीधे घरों तक नहीं भेजा जाता। पहले इसे प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है। फिर वहां गैस को प्यूरिफाई किया जाता है और उसे क्लीन किया जाता है।
इसके बाद इस गैस को बड़ी-बड़ी पाइपलाइनों के जरिए अलग-अलग शहरों तक भेजा जाता है। इन पाइपलाइनों का जाल पूरे देश में बिछा हुआ है। फिर शहरों के अंदर सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (City Gas Distribution) सिस्टम के जरिए छोटी पाइपलाइनों से गैस कॉलोनियों और घरों तक पहुंचाई जाती है।
जब पाइपलाइन आपके घर तक आती है, तो वहां एक मीटर लगाया जाता है। यह मीटर बताता है कि आपने कितनी गैस इस्तेमाल की है। उसी के हिसाब से आपका बिल बनता है।