न थकी न रुकी.. 159 साल की उम्र में भी बूढ़ी नहीं हुई भारत की यह ट्रेन, आज भी भरती है रफ्तार

Oldest Train of India: भारत में हर दिन तकरीबन 13 हजार यात्री ट्रेनें चलती हैं, जो लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक ले जाती है। भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल सेवा है। भारत में रेलवे ट्रैक की लंबाई 68 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा है।

Authored by: आदित्य साहूUpdated Nov 6 2025, 16:06 IST
भारत में ट्रेन का इतिहास काफी पुरानाImage Credit : IStock01 / 08

भारत में ट्रेन का इतिहास काफी पुराना

भारत में ट्रेन का इतिहास काफी ज्यादा पुराना है। साल 1853 में 16 अप्रैल के दिन मुंबई के बोरी बंदर से ठाणे के बीच देश की पहली ट्रेन चली थी।

पहली ट्रेन ने तय की थी 34 किलोमीटर की दूरीImage Credit : IStock02 / 08

पहली ट्रेन ने तय की थी 34 किलोमीटर की दूरी

भारत की पहली ट्रेन ने 34 किलोमीटर की दूरी तय की थी। इस दूरी को तय करने में 1 घंटे 15 मिनट का समय लगा था। इसमें 400 यात्री सवार थे।

159 साल से चल रही यह भारतीय ट्रेनImage Credit : IStock03 / 08

159 साल से चल रही यह भारतीय ट्रेन

आज हम आपको भारत की एक ऐसी ट्रेन के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पिछले 159 सालों से लगातार चल रही है। यह आज तक न थमी है और न रुकी है।

कौन सी है यह ट्रेनImage Credit : IStock04 / 08

कौन सी है यह ट्रेन

अब आप सोच रहे होंगे कि यह ट्रेन कौन सी है? तो चलिए हम भारत की इस दमदार ट्रेन की पूरी जानकारी आपको देते हैं।

कालका मेलImage Credit : IStock05 / 08

कालका मेल

हम जिस ट्रेन की बात कर रहे हैं, उसका नाम कालका मेल है। यह ट्रेन साल 1866 में कलकत्ता और दिल्ली के बीच शुरू हुई थी।

कालका तक किया गया विस्तारImage Credit : IStock06 / 08

कालका तक किया गया विस्तार

साल 1891 में इस ट्रेन का हरियाणा के कालका तक विस्तार किया गया। अब यह ट्रेन कलकत्ता से हावड़ा तक अपना सफर पूरा करती है।

ब्रिटिश काल में थी मशहूरImage Credit : IStock07 / 08

ब्रिटिश काल में थी मशहूर

ब्रिटिश काल में कालका मेल काफी मशहूर ट्रेन थी। दरअसल, यह ट्रेन खासतौर पर अंग्रेजों के लिए ही बनाई गई थी।

शिमला जाने के लिए बनाया था ट्रेनImage Credit : IStock08 / 08

शिमला जाने के लिए बनाया था ट्रेन

अंग्रेज शासन में उस दौरान कलकत्ता उनकी राजधानी हुआ करती थी। हालांकि, वहां की गर्मी से बचने और शिमला जाने के लिए अंग्रेजों ने इस ट्रेन का निर्माण किया था।

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