गर्मी के मौसम में AC अब शौक नहीं, बल्कि हर घर की जरूरत बन जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसमें ठंडक पैदा करने के लिए खास तरह की गैस का इस्तेमाल होता है। आमतौर पर AC में Refrigerant Gas डाली जाती है, जो गर्मी को सोखकर बाहर निकालती है।
पहले के समय में R-22 गैस का ज्यादा इस्तेमाल होता था, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कारण अब इसकी जगह R-32 और R-410A जैसी आधुनिक गैसें इस्तेमाल की जा रही हैं। ये गैसें ज्यादा इको-फ्रेंडली और एनर्जी एफिशिएंट मानी जाती हैं।
AC में मौजूद रेफ्रिजरेंट गैस एक खास प्रक्रिया के जरिए काम करती है जिसे Vapor Compression Cycle कहा जाता है। इस प्रक्रिया में गैस पहले कंप्रेस होकर गर्म होती है और फिर कंडेनसर के जरिए ठंडी होकर लिक्विड में बदलती है। इसके बाद यह फिर से गैस बनते हुए कमरे की गर्मी को सोख लेती है, जिससे ठंडक पैदा होती है। यही चक्र बार-बार चलता रहता है।
आमतौर पर AC में गैस बार-बार भरवाने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर गैस कम हो रही है, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं लीकेज है। ऐसी स्थिति में पहले लीकेज ठीक करवाना जरूरी होता है, फिर गैस भरवाई जाती है। सही मेंटेनेंस के साथ AC की गैस कई सालों तक चल सकती है।
AC में गैस भरवाने का खर्च कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे AC का टाइप (विंडो या स्प्लिट), इस्तेमाल की जाने वाली गैस और सर्विस चार्ज।
सामान्य तौर पर R-22 गैस भरवाने का खर्च 1500 से 2500 रुपये तक हो सकता है, जबकि R-32 या R-410A जैसी नई गैसों के लिए 2500 से 4000 रुपये तक खर्च आ सकता है। अगर लीकेज रिपेयर भी शामिल हो, तो कुल खर्च और बढ़ सकता है।
AC की बेहतर कूलिंग और लंबी उम्र के लिए समय-समय पर सर्विस कराना जरूरी है। फिल्टर साफ रखना, कॉइल की सफाई और गैस लेवल चेक करना, ये सभी चीजें AC की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाती हैं।