Buy Now Pay Later (BNPL) एक शॉर्ट-टर्म लोन सर्विस है, जिसमें महंगे सामान को आसान किस्तों में खरीदा जा सकता है। सामान खरीदते ही BNPL कंपनी विक्रेता को पूरा पैसा दे देती है और ग्राहक से किस्तों में भुगतान लेती है। इस सर्विस में आमतौर पर 25% डाउन पेमेंट करनी होती है और बाकी रकम कुछ हफ्तों या महीनों में किस्तों के रूप में चुकाई जा सकती है।
BNPL सर्विसेज ज्यादातर बिना ब्याज के होती हैं और इनमें अतिरिक्त शुल्क भी बहुत कम लगता है। इस वजह से यह क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन से सस्ता विकल्प माना जाता है। हालांकि, कुछ कंपनियां सर्विस चार्ज वसूलती हैं और लेट पेमेंट पर भारी पेनल्टी भी लगाती हैं।
आमतौर पर BNPL कंपनियां आपके पेमेंट डिटेल्स को क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट नहीं करतीं। लेकिन अगर आप समय पर भुगतान नहीं करते तो यह जानकारी रिपोर्ट की जा सकती है, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है। अगर क्रेडिट स्कोर खराब होता है तो आपको भविष्य में लोन लेने में भी दिक्कत आ सकती है।
BNPL कंपनियां लोन या प्रोडक्ट फाइनेंस करने से पहले दो तरह के क्रेडिट (सॉफ्ट क्रेडिट और हार्ड क्रेडिट) चेक कर सकती हैं। सॉफ्ट क्रेडिट चेक केवल आपकी पेमेंट क्षमता का अंदाजा लगाने के लिए किया जाता है और इसका स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता। वहीं, हार्ड क्रेडिट चेक क्रेडिट कार्ड या लोन की तरह होता है और यह आपके क्रेडिट स्कोर को थोड़ा कम कर सकता है।
इसका सबसे बड़ा फायदा है कि आप तुरंत महंगे सामान खरीद सकते हैं और बिना ब्याज के किस्तों में चुका सकते हैं। यानी कि जब बजट तंग हो तब भी जरूरी चीजें आप खरीद सकते हैं। इससे वित्तीय बोझ तुरंत नहीं पड़ता और आप आराम से बाद में भुगतान कर सकते हैं।
BNPL में रिटर्न और रिफंड की प्रक्रिया जटिल हो सकती है क्योंकि पेमेंट किस्तों में होता है। लेकिन किस्त लेट होती है तो आपको ज्यादा पेनाल्टी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा आपका क्रेडिट स्कोर भी बिगड़ सकता है। यह सर्विस अभी पूरी तरह रेगुलेटेड नहीं है, जिससे विवाद होने पर ग्राहक को कम सुरक्षा मिलती है। इसमें ओवरस्पेंडिंग का खतरा भी है।
BNPL का इस्तेमाल तभी करें जब आप सुनिश्चित हों कि किस्तें समय पर चुका पाएंगे। जरूरत से ज्यादा खरीदारी करने से बचें और ऑटो-डिडक्शन की सुविधा को ध्यान से मैनेज करें। कोशिश करें कि BNPL का इस्तेमाल सिर्फ जरूरी और प्लान किए गए खर्चों के लिए करें। अपनी मासिक सैलरी के 20% से ज्यादा किस्त न रखें।