गर्मी के मौसम में लोग राहत पाने के लिए कूलर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब ठंडक कम लगती है तो कई लोग कूलर के साथ छत का पंखा भी चालू कर देते हैं। यह आम आदत है, लेकिन क्या यह असरदार है या नहीं, यह जानना जरूरी है।
एसी और कूलर में काफी अंतर होता है। जहां एसी कमरे की गर्म हवा को ठंडा कर सर्कुलेट करता है, वहीं कूलर बाहर से गर्म हवा खींचकर उसे पानी के जरिए ठंडा करता है और फिर कमरे में छोड़ता है। इस प्रोसेस में वेंटिलेशन अहम होता है, जबकि पंखे से हवा की दिशा में रुकावट आ सकती है।
अगर कूलर के साथ छत का पंखा तेज गति से चलता है तो वह कूलर की ठंडी हवा की दिशा को बदल सकता है, जिससे कमरे में समान रूप से ठंडक नहीं पहुंचेगी और कूलिंग का असर घट जाता है।
अगर आपका कमरा बड़ा है तो पंखा चलाने से हवा पूरे कमरे में फैलती है, जिससे कूलिंग बेहतर हो सकती है। लेकिन छोटे कमरे में पंखा चलाने से हवा की दिशा में गड़बड़ी हो सकती है और गर्मी ज्यादा महसूस हो सकती है।
अगर छत बहुत गर्म हो रही हो तो पंखा चलाने से गर्म हवा नीचे आ सकती है, जिससे कूलिंग पर असर पड़ेगा। साथ ही, कूलर और पंखा एक साथ चलाने से बिजली की खपत बढ़ती है, जिससे बिल भी ज्यादा आता है।
यदि पंखा चलाना जरूरी हो तो उसे कम स्पीड पर चलाना चाहिए ताकि कूलर की ठंडी हवा पूरे कमरे में फैल सके। यह तरीका कमरे में ठंडक बनाए रखने में मददगार हो सकता है।