सबसे आम गलती है मिनिमम बैलेंस को नजरअंदाज करना। कई लोग इस नियम को गंभीरता से नहीं लेते और हर महीने पेनल्टी देते रहते हैं। धीरे-धीरे यह रकम बड़ी बन जाती है तब परेशान हो जाते हैं। इसलिए बेहतर है कि बैलेंस अलर्ट ऑन रखें और खाते में जरूरी राशि बनाए रखें।
कई लोग अपना अकाउंट सालों तक बिना अपडेट के इस्तेमाल करते रहते हैं। केवाईसी को लेकर बैंक की ओर से आए मैसेज को भी इग्नोर करते हैं, लेकिन KYC समय पर न कराने पर बैंक अकाउंट को ब्लॉक भी कर सकता है। इस स्थिति में लेन-देन करना, पैसे निकालना या कार्ड का इस्तेमाल बंद हो सकता है। इसलिए साल में कम से कम एक बार केवाईसी अपडेट जरूर कराएं।
ATM कार्ड, पासबुक या नेट बैंकिंग की डिटेल्स को लापरवाही से रखना भी बड़ी भूल है। पासवर्ड लिखकर रखना या किसी के साथ शेयर करना साइबर फ्रॉड का जोखिम बढ़ाता है। आजकल ऑनलाइन ठगी तेजी से बढ़ रही है, इसलिए डिजिटल सुरक्षा को कभी हल्के में न लें। बैंक या किसी भी अन्य शख्स को अपने बैंक अकाउंट के बारे में किसी भी जानकारी को शेयर ना करें।
जहां-तहां डेबिट कार्ड से पेमेंट करना भी सुरक्षित आदत नहीं है। संदिग्ध वेबसाइट, ओपन वाई-फाई या अज्ञात पेमेंट लिंक पर कार्ड की जानकारी डालना जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है। जरूरत पड़ने पर UPI या फिर क्रेडिट कार्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा।
इसके अलावा कई लोग पुराने सब्सक्रिप्शन और ऑटो-डेबिट सर्विसेज बंद नहीं करते, जिसकी वजह से हर महीने पैसे कटते रहते हैं और पता भी नहीं चलता। यूपीआई के आने के कारण ऑटो डेबिट बहुत आसान तो हो गया है लेकिन बड़ी मुसीबत भी है। महीने में एक बार अकाउंट स्टेटमेंट जरूर चेक करें।
यदि आपके पास कई बैंकों के अकाउंट हैं, तो उन्हें संभालना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर अकाउंट डॉर्मेंट हो सकता है और बाद में री-एक्टिवेशन की परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इसलिए जरूरत के अनुसार सीमित अकाउंट रखें और बाकी बंद करा दें।