आमतौर पर एक सामान्य डेजर्ट कूलर या घरेलू कूलर करीब 100 से 200 Watt तक बिजली की खपत करता है। अगर आपके पास 200 Watt का सोलर पैनल है और धूप अच्छी मिल रही है तो कूलर दिन के समय सीधे सोलर पावर से चल सकता है,
हालांकि सोलर पैनल सिर्फ धूप रहने तक ही बिजली बनाता है। शाम या रात में कूलर चलाने के लिए बैटरी स्टोरेज की जरूरत होती है। बिना बैटरी के सोलर पैनल रात में कूलर नहीं चला सकता।
अगर आप कूलर को पूरी रात यानी करीब 8 से 10 घंटे चलाना चाहते हैं तो सिर्फ सोलर पैनल पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए सोलर पैनल के साथ इन्वर्टर और बैटरी सिस्टम लगाना जरूरी होगा।
एक सामान्य 150 Watt कूलर को रातभर चलाने के लिए लगभग 300 से 500 Watt का सोलर पैनल सिस्टम और पर्याप्त क्षमता वाली बैटरी की जरूरत पड़ सकती है। अगर कूलर बड़ा है या ज्यादा पावर लेता है तो इससे ज्यादा क्षमता का सिस्टम लगाना पड़ सकता है।
रात में कूलर चलाने के लिए बैटरी सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। उदाहरण के लिए 150 Watt का कूलर अगर 8 घंटे चले तो उसे करीब 1200 Wh (वॉट-आवर) ऊर्जा की जरूरत होगी। इसके लिए अच्छी क्षमता वाली बैटरी की आवश्यकता होगी, ताकि बीच रात में बिजली खत्म न हो। लिथियम बैटरी ज्यादा लंबे समय तक चलती है और इसकी परफॉर्मेंस बेहतर होती है, लेकिन इसकी कीमत सामान्य बैटरी से ज्यादा होती है।
सोलर पैनल खरीदने से पहले कूलर की बिजली खपत, आपके क्षेत्र में मिलने वाली धूप और बैटरी बैकअप की जरूरत को ध्यान में रखना चाहिए।
ज्यादा गर्म इलाकों में जहां कूलर ज्यादा समय चलता है, वहां ज्यादा क्षमता वाला सोलर सिस्टम बेहतर विकल्प हो सकता है। सही क्षमता का सोलर सिस्टम लगाने से बिजली बिल कम करने के साथ-साथ बिजली कटौती के समय भी कूलर चलाने की सुविधा मिल सकती है।