भारत के अधिकांश शहरों में अब ठंड का मौसम दस्तक दे चुका है। ठंड आ जाने की वजह से अब अधिकतर घरों में पंखे धीमी गति पर चलने लगे हैं। बहुत से घर ऐसे भी हैं जहां पंखे का इस्तेमाल बिलकुल ही बंद हो चुका है।
अधिकतर लोगों को लगता है कि क्यूंकि पंखा अब धीमी गति पर चल रहा है तो यह कम बिजली का इस्तेमाल करेगा और इस तरह बिजली बिल में भी कमी आएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस बात में कितनी सच्चाई है?
इससे पहले कि आप पंखे को धीमी गति पर चलाने से उसपर होने वाले असर को समझें, आपको पंखे की बिजली की खपत के बारे में जान लेना चाहिए। अगर आप एक पंखे को दिन में 12 घंटे तक नॉन स्टॉप चलाएं तो भी यह 0.9 वाट बिजली इस्तेमाल करता है। ध्यान रहे 1 यूनिट बिजली का मतलब 1000 वाट होता है।
पंखे की स्पीड को कम करना हो या इसे बढ़ाना हो, रेगुलेटर बहुत ही काम की चीज होती है। रेगुलेटर पंखे की मोटर तक जाने वाले वोल्टेज को कम करता है इसकी वजह से ही पंखे की रफ्तार कम हो जाती है।
अब क्योंकि पंखे की मोटर तक उतनी ही वोल्टेज नहीं पहुंच रही है जितनी पहले पहुंच रही थी इसीलिए बिजली की खपत कम हो जाती है। इस तरह रेगुलेटर अगर काम कर रहा है तो धीमी गति पर पंखा चलाने से इसकी बिजली की खपत सचमुच कम हो जाती है।