चारों तरफ ऊंचे पहाड़, बहती नदी, लकड़ी के पुराने घर और दूर-दूर तक फैली प्राकृतिक खूबसूरती छितकुल की पहचान है। अगर आप भी कुछ दिन प्रकृति के करीब बिताना चाहते हैं तो छितकुल की यात्रा आपके लिए यादगार हो सकती है।
यहां आप बसपा नदी के किनारे बैठकर बहते पानी की आवाज सुन सकते हैं, पहाड़ों को निहार सकते हैं और गांव की गलियों में बिना किसी जल्दबाजी के घूम सकते हैं।
नदी के किनारे खड़े होकर सामने फैली घाटी और ऊंचे पहाड़ों को देखना अपने आप में एक यादगार अनुभव है। यहां पहाड़ों के बीच बहती नदी आसपास के नजारों को और भी आकर्षक बना देती है।
माथी मंदिर, बसपा नदी का किनारा, गांव की पुरानी गलियां और पहाड़ों के खूबसूरत नजारे इस गांव की पहचान है। अगर आपके पास समय है, तो आसपास के इलाके को आराम से घूमने की योजना बनाएं।
दिल्ली से छितकुल जाने के लिए आम तौर पर शिमला, नारकंडा, रामपुर बुशहर, किन्नौर के रिकांग पिओ और सांगला होते हुए जाना पड़ता है। सांगला से छितकुल की दूरी लगभग 20-25 किलोमीटर है।
छितकुल में ठहरने के लिए होमस्टे, गेस्टहाउस और छोटे होटल आराम से मिल जाते हैं। अगर आप स्थानीय संस्कृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो होमस्टे में रुकना अच्छा विकल्प हो सकता है।