देश में डिजिटल बैंकिंग के तेजी से विस्तार के साथ साइबर ठगी के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। हाल के दिनों में Aadhaar Enabled Payment System (AEPS) से जुड़े फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े हैं। सरकारी साइबर एजेंसी साइबर दोस्त ने इसके बारे में लोगों को आगाह किया है। यह सिस्टम की कमी नहीं, बल्कि आधार आधारित ऑथेंटिकेशन के गलत इस्तेमाल का नतीजा है, जिसे साइबर अपराधी नए डिजिटल टूल्स के जरिए भुना रहे हैं।
AEPS को NPCI ने खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बैंकिंग सुविधाएं आसान बनाने के लिए विकसित किया था। इसमें आधार नंबर और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (जैसे फिंगरप्रिंट या फेस) के जरिए ट्रांजैक्शन किया जाता है। लेकिन अब यही सुविधा ठगों के लिए आसान रास्ता बनती जा रही है।
ठग सबसे पहले डेटा लीक, फिशिंग वेबसाइट या सोशल मीडिया के जरिए लोगों की आधार और पर्सनल जानकारी जुटाते हैं। मतलब फेसबुक या सोशल मीडिया से आपकी फोटो ली जाती है। अन्य तरीके से आपका आधार नंबर हासिल किया जाता है।
इसके बाद AI टूल्स की मदद से फर्जी डिजिटल पहचान तैयार की जाती है और बायोमेट्रिक क्लोनिंग या मैनिपुलेशन के जरिए सिस्टम को धोखा दिया जाता है। कई मामलों में फर्जी एजेंट कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए बिना जानकारी के ट्रांजैक्शन कर देते हैं।
इससे बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि आयूज़र्स को अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करना चाहिए, SMS अलर्ट ऑन रखना चाहिए और हर ट्रांजैक्शन पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, आधार की कॉपी अनावश्यक रूप से शेयर न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या एजेंट पर भरोसा न करें।
अपने आधार कार्ड की बायोमैट्रिक डाटा को आप आधार की वेबसाइट या आधार ऐप में लॉगिन करके कर सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि जब तक यह लॉक नहीं हटेगा, कोई आपके फेस आईडी, फिंगरप्रिंट्स और रेटिना प्रिंट्स का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने भी चेतावनी दी है कि अब साइबर अपराधी AI का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल और डिजिटल पहचान बना रहे हैं, जिससे फ्रॉड पकड़ना और मुश्किल हो गया है।