जब स्मार्टफोन लंबे समय तक लगातार चलता रहता है, तब बैकग्राउंड में कई एप्स और प्रोसेस एक्टिव रहते हैं। इससे फोन की RAM और सिस्टम रिसोर्सेज पर असर पड़ता है। फोन री-स्टार्ट करने पर ये अस्थायी प्रोसेस बंद हो जाते हैं और सिस्टम नई शुरुआत करता है। इससे फोन पहले की तुलना में ज्यादा स्मूद काम कर सकता है।
री-स्टार्ट करने से कई छोटे-मोटे सॉफ्टवेयर बग और हैंग होने जैसी समस्याएं भी अपने आप ठीक हो जाती हैं। अगर फोन स्लो चल रहा हो या एप्स बार-बार क्रैश हो रहे हों, तो एक साधारण री-स्टार्ट काफी मददगार साबित हो सकता है।
फोन को री-स्टार्ट करने से बैटरी परफॉर्मेंस में भी सुधार हो सकता है। कई बार बैकग्राउंड में चल रही प्रक्रियाएं जरूरत से ज्यादा बैटरी खर्च करती रहती हैं। री-स्टार्ट के बाद ऐसे अनावश्यक प्रोसेस बंद हो जाते हैं, जिससे बैटरी की खपत कम हो सकती है।
इसके अलावा नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या होने पर भी फोन री-स्टार्ट करना फायदेमंद माना जाता है। कई बार कॉल ड्रॉप, धीमा इंटरनेट या वाई-फाई कनेक्शन की दिक्कत सिर्फ फोन को दोबारा चालू करने से ठीक हो जाती है।
टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर रोज फोन री-स्टार्ट करना जरूरी नहीं है, लेकिन सप्ताह में एक या दो बार ऐसा करना अच्छा माना जाता है, हालांकि अगर फोन बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है या उसमें बार-बार स्लोनेस महसूस हो रही है, तो रोजाना री-स्टार्ट करने से भी फायदा मिल सकता है। वरना हफ्ते में एक बार जरूर करें।
सामान्य तौर पर फोन री-स्टार्ट करने से कोई बड़ा नुकसान नहीं होता, लेकिन बार-बार पावर ऑन और ऑफ करने से कुछ मामलों में हार्डवेयर पर हल्का असर पड़ सकता है।
जरूरत से ज्यादा ऐसा करने से बचना चाहिए। फोन को समय-समय पर री-स्टार्ट करने के साथ-साथ सॉफ्टवेयर अपडेट और स्टोरेज क्लीनिंग पर भी ध्यान देना जरूरी है, ताकि स्मार्टफोन लंबे समय तक बेहतर तरीके से काम करता रहे।