देश में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम को रोकने के लिए अब टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म WhatsApp ने केंद्र सरकार को जानकारी दी है कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम लागू किए हैं, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को ठगने वालों की पहचान कर उन्हें हटाने में मदद करेंगे। ये स्कैम खासतौर पर बुजुर्गों को निशाना बनाकर उनकी जमा पूंजी ठगने के लिए किए जा रहे थे।
यह जानकारी अटॉर्नी जनरलआर वेंकटारमानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट के जरिए दी। यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की ओर से दाखिल की गई। इसमें दूरसंचार विभाग, रिजर्व बैंक, आईटी मंत्रालय, टेलीकॉम कंपनियों और WhatsApp के साथ हुई बैठक के आधार पर उठाए गए कदमों का विवरण दिया गया है।
WhatsApp ने बताया कि उसने AI और मशीन लर्निंग (ML) आधारित “लोगो डिटेक्शन” और “मीडिया मैचिंग” सिस्टम तैयार किए हैं। ये सिस्टम सरकारी एजेंसियों के नाम और लोगो का गलत इस्तेमाल करने वाले अकाउंट्स को पहचानते हैं। साथ ही, यूजर्स को संदिग्ध चैट या कॉल के दौरान चेतावनी देने के लिए विशेष अलर्ट मैकेनिज्म भी जोड़े गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, WhatsApp ने आश्वासन दिया है कि वह लंबे समय तक चलने वाले स्कैम कॉल्स और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करेगा। कंपनी अगले एक महीने में और तकनीकी समाधान पेश करेगी, जिससे ऐसे फ्रॉड को समय रहते रोका जा सके।
WhatsApp ने यह भी कहा है कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों और I4C के साथ मिलकर काम करेगा। स्कैम नेटवर्क, फर्जी अकाउंट और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में साझा की गई जानकारी पर तेजी से कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए टेलीकॉम स्तर पर भी बड़े कदम उठाए हैं। सभी टेलीकॉम कंपनियों को सिम कार्ड जारी करने से पहले बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, देशभर में सिम कार्ड धारकों का एक नेशनल डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
दूरसंचार विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह छह महीने के भीतर ऐसा सिस्टम विकसित करे, जिससे सभी ऑपरेटरों के बीच सिम जारी करने की जानकारी साझा हो सके। इसके बाद नौ महीने के भीतर, यानी दिसंबर 2026 तक, बायोमेट्रिक आधारित क्रॉस-ऑपरेटर मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को यह भी निर्देश दिया है कि एक ही व्यक्ति द्वारा कई फर्जी सिम लेने की प्रवृत्ति को रोका जाए। इसके लिए पॉइंट ऑफ सेल (PoS) की पहचान और ट्रेसबिलिटी को मजबूत किया जाएगा, ताकि साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
इन सभी कदमों से साफ है कि सरकार और टेक कंपनियां मिलकर साइबर अपराधों पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं। AI आधारित निगरानी और सख्त वेरिफिकेशन सिस्टम के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे खतरनाक स्कैम पर रोक लगाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।