डिजिटल अरेस्ट पर लगेगा फुल स्टॉप! सरकारी एजेंसियों के लोगो ब्लॉक करेगा WhatsApp

Digital Arrest: भारत में डिजिटल अरेस्ट से बड़ा शायद ही कोई स्कैम हुआ होगा। हर दिन लोग इसके शिकार हो रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि डिजिटल अरेस्ट के शिकार पढ़े-लिखे लोग ही हो रहे हैं। यहां तक कि पुलिस के बड़े अधिकारी भी इसकी चपेट में आ चुके हैं।

Authored by: प्रदीप पाण्डेयUpdated Apr 29 2026, 09:31 IST
WhatsApp की तैयारी01 / 09

WhatsApp की तैयारी

देश में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम को रोकने के लिए अब टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म WhatsApp ने केंद्र सरकार को जानकारी दी है कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम लागू किए हैं, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को ठगने वालों की पहचान कर उन्हें हटाने में मदद करेंगे। ये स्कैम खासतौर पर बुजुर्गों को निशाना बनाकर उनकी जमा पूंजी ठगने के लिए किए जा रहे थे।

सरकार और एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाईImage Credit : CANVA02 / 09

सरकार और एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाई

यह जानकारी अटॉर्नी जनरलआर वेंकटारमानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट के जरिए दी। यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की ओर से दाखिल की गई। इसमें दूरसंचार विभाग, रिजर्व बैंक, आईटी मंत्रालय, टेलीकॉम कंपनियों और WhatsApp के साथ हुई बैठक के आधार पर उठाए गए कदमों का विवरण दिया गया है।

AI से होगी फर्जी पहचान की पहचानImage Credit : CANVA03 / 09

AI से होगी फर्जी पहचान की पहचान

WhatsApp ने बताया कि उसने AI और मशीन लर्निंग (ML) आधारित “लोगो डिटेक्शन” और “मीडिया मैचिंग” सिस्टम तैयार किए हैं। ये सिस्टम सरकारी एजेंसियों के नाम और लोगो का गलत इस्तेमाल करने वाले अकाउंट्स को पहचानते हैं। साथ ही, यूजर्स को संदिग्ध चैट या कॉल के दौरान चेतावनी देने के लिए विशेष अलर्ट मैकेनिज्म भी जोड़े गए हैं।

संदिग्ध कॉल और स्कैम पर नजरImage Credit : CANVA04 / 09

संदिग्ध कॉल और स्कैम पर नजर

रिपोर्ट के अनुसार, WhatsApp ने आश्वासन दिया है कि वह लंबे समय तक चलने वाले स्कैम कॉल्स और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करेगा। कंपनी अगले एक महीने में और तकनीकी समाधान पेश करेगी, जिससे ऐसे फ्रॉड को समय रहते रोका जा सके।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोगImage Credit : CANVA05 / 09

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग

WhatsApp ने यह भी कहा है कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों और I4C के साथ मिलकर काम करेगा। स्कैम नेटवर्क, फर्जी अकाउंट और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में साझा की गई जानकारी पर तेजी से कार्रवाई की जाएगी।

सिम कार्ड वेरिफिकेशन सिस्टम होगा मजबूतImage Credit : CANVA06 / 09

सिम कार्ड वेरिफिकेशन सिस्टम होगा मजबूत

सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए टेलीकॉम स्तर पर भी बड़े कदम उठाए हैं। सभी टेलीकॉम कंपनियों को सिम कार्ड जारी करने से पहले बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, देशभर में सिम कार्ड धारकों का एक नेशनल डेटाबेस तैयार किया जाएगा।

2026 तक लागू होगा नया सिस्टमImage Credit : CANVA07 / 09

2026 तक लागू होगा नया सिस्टम

दूरसंचार विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह छह महीने के भीतर ऐसा सिस्टम विकसित करे, जिससे सभी ऑपरेटरों के बीच सिम जारी करने की जानकारी साझा हो सके। इसके बाद नौ महीने के भीतर, यानी दिसंबर 2026 तक, बायोमेट्रिक आधारित क्रॉस-ऑपरेटर मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

फर्जी सिम और टेलीमार्केटिंग पर भी लगामImage Credit : Canva08 / 09

फर्जी सिम और टेलीमार्केटिंग पर भी लगाम

सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को यह भी निर्देश दिया है कि एक ही व्यक्ति द्वारा कई फर्जी सिम लेने की प्रवृत्ति को रोका जाए। इसके लिए पॉइंट ऑफ सेल (PoS) की पहचान और ट्रेसबिलिटी को मजबूत किया जाएगा, ताकि साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

साइबर फ्रॉड पर टेक्नोलॉजी का वारImage Credit : Canva09 / 09

साइबर फ्रॉड पर टेक्नोलॉजी का वार

इन सभी कदमों से साफ है कि सरकार और टेक कंपनियां मिलकर साइबर अपराधों पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं। AI आधारित निगरानी और सख्त वेरिफिकेशन सिस्टम के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे खतरनाक स्कैम पर रोक लगाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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