महंगे फोन आमतौर पर मेटल, ग्लास या सिरेमिक जैसी प्रीमियम मटेरियल से बने होते हैं, जबकि सस्ते फोन में प्लास्टिक का उपयोग अधिक होता है। आजकल आईफोन और सैमसंग के महंगे फोन को टाइटेनियम से भी बनाया जा रहा है। यह काफी मजबूत होते हैं।
महंगे फोन में AMOLED, OLED, या LTPO डिस्प्ले होते हैं, जिनका रिफ्रेश रेट 120Hz या इससे भी ज्यादा होता है। इसके अलावा इन डिस्प्ले को काफी ज्यादा ब्राइट बनाया जाता है। ताकि कड़ी धूप में भी फोन का डिस्प्ले अच्छे से दिखाई दे।
महंगे फोन को इनका हाईटेक कैमरा महंगा बनाता है। इन फोन में लेटेस्ट OIS, टेलीफोटो सेंसर और पेरिस्कोप लेंस के साथ जूम जैसे फायदे मिलते हैं। सैमसंग तो अपने फ्लैगशिप फोन के साथ 100X तक का जूम देता है और कंपनी दावा करती है यह कैमरा चांद की थी सटीक फोटो ले सकता है।
महंगे फोन में हाई-एंड प्रोसेसर (जैसे Snapdragon 8 Gen 3 या Apple A18 Bionic) मिलते हैं, जो बेहतर स्पीड और मल्टीटास्किंग एक्सपीरियंस देते हैं। यह फोन बड़े से बड़े टास्ट को भी मक्खन की तरह हैंडल कर सकते हैं। इसके अलावा इन स्मार्टफोन में स्टोरेज कैपेसिटी भी काफी ज्यादा मिलती है।
महंगे फोन में लंबे समय तक (4-5 साल तक) सॉफ्टवेयर अपडेट और सिक्योरिटी पैच मिलते हैं, जबकि सस्ते फोन में यह 1-2 साल तक सीमित हो सकता है। सैमसंग और गूगल जैसे स्मार्टफोन अपने फोन में 6 से 7 साल तक के ओएस अपडेट देते हैं।