सरकार ने 2.5 करोड़ आधार कार्ड कर दिए बंद, जानें क्यों लिया गया ये फैसला?

आधार कार्ड एक बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट बन चुका है। इसका इस्तेमाल हर उस जगह पर होता है जहां पर आईडी प्रूफ की जरूरत होती है। आधार कार्ड को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। सरकार की तरफ से 2.5 करोड़ लोगों का आधार कार्ड डीएक्टिवेट कर दिया गया है।

Authored by: गौरव तिवारीUpdated Feb 4 2026, 20:23 IST
ऑनलाइन साइबर क्राइम और फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार की तरफ से बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने 2.5 करोड़ से ज्यादा मृतक लोगों के आधार कार्ड को बंद कर दिया है।Image Credit : Digit01 / 09

ऑनलाइन साइबर क्राइम और फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार की तरफ से बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने 2.5 करोड़ से ज्यादा मृतक लोगों के आधार कार्ड को बंद कर दिया है।

सरकार का कहना है कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसका आधार सक्रिय रहना पहचान की चोरी और सरकारी योजनाओं के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ा सकता है। इस बारे में जानकारी संसद में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने दी।Image Credit : Digit02 / 09

सरकार का कहना है कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसका आधार सक्रिय रहना पहचान की चोरी और सरकारी योजनाओं के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ा सकता है। इस बारे में जानकारी संसद में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने दी।

उन्होंने बताया कि आज के समय में आधार दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान सिस्टम है, जिसमें करीब 134 करोड़ सक्रिय आधार मौजूद हैं। आधार डेटाबेस की सटीकता और भरोसे को बनाए रखने के लिए UIDAI लगातार कई कदम उठाती है।Image Credit : Digit03 / 09

उन्होंने बताया कि आज के समय में आधार दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान सिस्टम है, जिसमें करीब 134 करोड़ सक्रिय आधार मौजूद हैं। आधार डेटाबेस की सटीकता और भरोसे को बनाए रखने के लिए UIDAI लगातार कई कदम उठाती है।

मंत्री की तरफ से संसद में बताया गया कि अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है और उसका आधार नंबर बंद नहीं किया जाए तो भविष्य में इससे पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी हो सकती है।Image Credit : Digit04 / 09

मंत्री की तरफ से संसद में बताया गया कि अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है और उसका आधार नंबर बंद नहीं किया जाए तो भविष्य में इससे पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी हो सकती है।

साइबर क्रिमिनल्स मृतक के आधार का गलत इस्तेमाल कर सरकारी योजनाओं का लाभ लेना, बैंकिंग में धोखाधड़ी करना और अन्य गैरकानूनी काम होने का खतरा रहता है। इसी कारण UIDAI अब तक 2.5 करोड़ से ज्यादा ऐसे आधार नंबर डीएक्टिवेट कर चुकी है।Image Credit : Digit05 / 09

साइबर क्रिमिनल्स मृतक के आधार का गलत इस्तेमाल कर सरकारी योजनाओं का लाभ लेना, बैंकिंग में धोखाधड़ी करना और अन्य गैरकानूनी काम होने का खतरा रहता है। इसी कारण UIDAI अब तक 2.5 करोड़ से ज्यादा ऐसे आधार नंबर डीएक्टिवेट कर चुकी है।

सरकार ने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि आधार डेटाबेस में जो पता दर्ज है, जरूरी नहीं कि उसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में व्यक्ति की मौत दर्ज हुई हो। इसलिए अलग-अलग राज्यों से जानकारी मिलाकर आधार नंबर को बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।Image Credit : Digit06 / 09

सरकार ने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि आधार डेटाबेस में जो पता दर्ज है, जरूरी नहीं कि उसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में व्यक्ति की मौत दर्ज हुई हो। इसलिए अलग-अलग राज्यों से जानकारी मिलाकर आधार नंबर को बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

आपको बता दें कि आधार को और सुरक्षित बनाने के लिए UIDAI ने कई तकनीकी सुविधाए ला रहा है। इसमें बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक फीचर की मदद से आधार धारक अपने फिंगरप्रिंट और आईरिस डेटा को लॉक कर सकता है, ताकि कोई किसी भी तरह से आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल न हो पाए।Image Credit : Digit07 / 09

आपको बता दें कि आधार को और सुरक्षित बनाने के लिए UIDAI ने कई तकनीकी सुविधाए ला रहा है। इसमें बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक फीचर की मदद से आधार धारक अपने फिंगरप्रिंट और आईरिस डेटा को लॉक कर सकता है, ताकि कोई किसी भी तरह से आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल न हो पाए।

आधार कार्ड को सिक्योर करने के लिए और यूजर्स को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए इसमें फेस ऑथेंटिकेशन में लाइवनेस डिटेक्शन फीचर भी जोड़ा गया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि लेन-देन के समय लाभार्थी स्वयं मौजूद है।Image Credit : Digit08 / 09

आधार कार्ड को सिक्योर करने के लिए और यूजर्स को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए इसमें फेस ऑथेंटिकेशन में लाइवनेस डिटेक्शन फीचर भी जोड़ा गया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि लेन-देन के समय लाभार्थी स्वयं मौजूद है।

आपको बता दें कि UIDAI की तरफ से यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि आधार धारकों की मुख्य बायोमेट्रिक जानकारी किसी के साथ शेयर नहीं की जाती। सभी एजेंसियों के लिए आधार डेटा वॉल्ट का इस्तेमाल अनिवार्य है, जिसमें आधार नंबर एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा, आधार सिक्योर QR कोड, पेपरलेस ऑफलाइन ई-KYC, ई-आधार और वेरिफाएबल क्रेडेंशियल्स जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।Image Credit : Digit09 / 09

आपको बता दें कि UIDAI की तरफ से यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि आधार धारकों की मुख्य बायोमेट्रिक जानकारी किसी के साथ शेयर नहीं की जाती। सभी एजेंसियों के लिए आधार डेटा वॉल्ट का इस्तेमाल अनिवार्य है, जिसमें आधार नंबर एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा, आधार सिक्योर QR कोड, पेपरलेस ऑफलाइन ई-KYC, ई-आधार और वेरिफाएबल क्रेडेंशियल्स जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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