जवाब- बिल्कुल हां। ब्रह्मांड में अरबों तारें हैं और हम एक तारे के भीतर छोटे से धरती में रह रहे हैं। पृथ्वी पर ऐसी जगहों पर जीवन है, जहां हमने पहले कभी नहीं सोचा था। सुनिता विलियम्स ने कहा कि स्पेस में ऐसी हल्की चीजें मौजूद हैं, जो बिना किसी दबाव और बिना रोशनी के रह सकती हैं।
सुनीता विलियम्स ने कहा कि जब बुच (बुच विल्मोर) ने स्पेस स्टेशन के बाहर जब सफाई की तो उन्हें अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर कुछ सूक्ष्म जीव मिले। हालांकि, उम्मीद है कि वो सूक्ष्म जीव हमारी वजह से ही आए हों। हमें यह उम्मीद है कि अंतरिक्ष की गर्मी और ठंड में जीवन उत्पन्न हो सकता है।
सुनीता विलियम्स ने आगे कहा कि बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा पर पानी हो सकता है। उन चंद्रमाओं पर एक न एक रोवर भेजकर और बर्फ के बीच एक रोवर उतारकर देखना होगा कि क्या हो रहा है। हालांकि, ऐसा करने की कुछ योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं। अगर बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा पर पानी है तो कुछ तो है।
सुनीत विलियम्स ने आगे कहा कि हम जानते हैं कि चांद और मंगल ग्रह पर किसी प्रकार के तरल पदार्थ हैं, तो कुछ हो सकता है। मुझे लगता है कि मंगल ग्रह पर कुछ जीवन हो सकता है।
सुनीता विलियम्स ने अपनी 27 साल लंबी शानदार पारी को विराम दिया है। अब वह चाहती हैं कि नई पीढ़ी इस जिम्मेदारी को संभाले और अंतरिक्ष के रहस्यों को खोजे। पिछले साल बोइंग स्टारलाइनर मिशन के दौरान वह करीब नौ महीने अंतरिक्ष में फंसी रही थीं। यह उनके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण और यादगार समय था।
यह मिशन शुरुआत में सिर्फ आठ दिनों का होना था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में आई तकनीकी खामी ने पूरे प्लान को बदल दिया। हालात ऐसे बने कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर नौ महीने से भी ज्यादा समय तक रुकना पड़ा।इस लंबे और अनिश्चित मिशन के दौरान सुनीता ने अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों का साहस और धैर्य के साथ सामना किया। हर दिन एक नई चुनौती थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी के बाद उन्होंने अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर खास ध्यान दिया। सामान्य जीवन में लौटने के लिए उन्हें एक लंबे और अनुशासित रूटीन से गुजरना पड़ा।
इस पूरे सफर में उनका परिवार उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना रहा। सुनीता विलियम्स पहले भी कई चुनौतीपूर्ण मिशनों का हिस्सा रही हैं, और यह अनुभव एक बार फिर उनकी हिम्मत, जज़्बे और समर्पण को साबित करता है।
सुनीता ने अपनी संस्कृति और जड़ों को कभी नहीं भुलाया है। वह अंतरिक्ष में भारतीय भोजन भी साथ लेकर गई थीं। उनके इस दौरे से भारतीय युवाओं में विज्ञान और अंतरिक्ष को लेकर नई उम्मीदें जाग गई हैं। वह भारत और अमेरिका के बीच मजबूत अंतरिक्ष सहयोग की बड़ी पक्षधर हैं।