वास्तु शास्त्र अनुसार स्टडी रूम को हमेशा घर की पूर्व, पश्चिम या उत्तर दिशा में होना चाहिए। तो वहीं घर में स्टडी टेबल रखते समय ये भी सुनिश्चित जरूर करें कि बच्चा का पढ़ते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रहे। इससे बच्चे का पढ़ाई में खूब मन लगेगा।
स्टडी टेबल को दीवार से कम से कम 3-4 इंच की दूरी पर रखना चाहिए। जिस दिशा में छात्र मुंह करके बैठे उसके सामने खाली जगह जरूर होनी चाहिए।
इस बात का ध्यान रखें कि स्टडी टेबल और चेयर के ठीक पीछे दरवाजा नहीं होना चाहिए। स्टडी टेबल के सामने एक खुला क्षेत्र होना चाहिए।
अगर आपकी स्टडी टेबल लकड़ी की है, तो उसे रखने के लिये पूर्व दिशा या आग्नेय कोण (पूर्व और दक्षिण दिशा के बीच का स्थान) की दिशा उचित है। कहते हैं इस दिशा में रखी गई लकड़ी की स्टडी टेबल पर बैठकर बढ़ने से एकाग्रता बढ़ती है।
लेकिन अगर आपकी स्टडी टेबल अन्य किसी धातु जैसे लोहे की है तो उसके लिए पश्चिम दिशा या वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) का चुनाव करें।
वास्तु शास्त्र अनुसार स्टडी टेबल के ऊपर कोई बीम या कैबिनेट नहीं होना चाहिए कयोंकि इससे पढ़ते समय मन में नकारात्मक विचार आते हैं। इसके अलावा स्टडी रूम में सभी पुरस्कार और प्रमाण पत्र उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाएं। इससे पढ़ाई में मन लगा रहेगा।
स्टडी टेबल की सामने वाली दीवार पर अच्छे पोस्टर या पढ़ाई सम्बंधित सामग्रियां टांग देनी चाहिए। इससे सकारात्मकता बनी रहेगी।
स्टडी टेबल में ज्यादा प्रकाश के लिए टेबल लैंप रखना है तो इसके लिए स्टडी टेबल के बाईं ओर का स्थान उचित माना जाता है और टेबल के दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में लैंप रखा होना चाहिए।(डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है। timesnowhindi.com इसकी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता है। इसलिए किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की राय जरूर लें।)