न काले, न नीले बल्कि इस रंग के थे भगवान कृष्ण, इस मूर्ति में आज भी धड़कता है इनका दिल

janmashtami 2024: भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े कई रोचक तथ्य हैं जिनके बारे में हर कोई जानता है। लेकिन यहां हम कृष्ण जी से जुड़ी ऐसी बातों के बारे में बताएंगे जो शायद ही आपने कभी सुनी हो।

Authored by: लवीना शर्माUpdated Aug 25 2024, 08:19 IST
भगवान कृष्ण की लीलाएंImage Credit : Instagram01 / 06

भगवान कृष्ण की लीलाएं

भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था जो इस साल 26 अगस्त को पड़ रही है। इसलिए जन्माष्टमी का पावन पर्व इस साल 26 अगस्त 2024 को मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर जानें श्री कृष्ण जी के जीवन से जुड़ी अनसुनी बातें।

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किस रंग के थे भगवान कृष्ण

ज्यादातर लोग ऐसा मानते हैं कि कृष्ण भगवान श्याम रंग के थे। श्याम रंग का अर्थ कुछ काला और कुछ नीला होता है। मतलब काले जैसा नीला। लेकिन जनश्रुति अनुसार कृष्ण जी का रंग न तो काला था और न नीला। बल्कि वे मेघ श्यामल रंग के थे। अर्थात काला, नीला और सफेद रंग का मिश्रण।

शरीर से आती थी आकर्षक गंधImage Credit : Instagram03 / 06

शरीर से आती थी आकर्षक गंध

जनश्रुति अनुसार भगवान कृष्ण के शरीर ने मादक गंध निकलती रहती है। ये गंध किसी को भी उनकी तरफ आकर्षिक कर लेती थी। कहते हैं यही खूबी द्रौपदी में भी थी।

श्रीकृष्ण भगवान की विशेष खूबीImage Credit : Instagram04 / 06

श्रीकृष्ण भगवान की विशेष खूबी

कहते हैं भगवान कृष्ण का देह बेहद कोमल था लेकिन युद्ध के समय वह कठोर हो जाता था। इसका अर्थ है कि भगवान कृष्ण अपनी देह को किसी भी प्रकार का बना सकते थे।

श्री कृष्ण की पत्नियांImage Credit : Instagram05 / 06

श्री कृष्ण की पत्नियां

ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की 16 हजार पटरानियां थीं। लेकिन ऐसा नहीं है कृष्ण जी की मात्र 8 पत्नियां थीं।

आज भी धड़कता है श्रीकृष्ण का दिलImage Credit : Instagram06 / 06

आज भी धड़कता है श्रीकृष्ण का दिल

ऐसा कहा जाता है कि जगन्नाथ पुरी की मूर्ति में भगवान कृष्ण के दिल का एक पिंड रखा हुआ है। कहते हैं श्रीकृष्ण भगवान के देह त्यागने के बाद पांडवों ने उनके शरीर का दाह-संस्कार किया था लेकिन उनका दिल जलता रहा था। जिसे पांडवों ने बाद में जल में प्रवाहित कर दिया था। कहते हैं कृष्ण जी के दिल ने लट्ठे का रूप ले लिया था। बाद में ये लट्ठा राजा इन्द्रद्युम्न को मिला तो उन्होंने इसे भगवान जगन्नाथ क मूर्ति में स्थापित करवा दिया था।

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