खगोलविद लगातार मंगल ग्रह को लेकर तरह-तरह के अध्ययन करते रहते हैं, इन्हीं में शामिल है पानी की मौजूदगी से जुड़ा रहस्य... खगोलविद लंबे समय से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर रेड प्लैनेट का पानी कहां चला गया? (फोटो साभार: iStock)
माना जाता है कि मंगल ग्रह पर कभी बेतहाशा पानी हुआ करता था, जिससे पूरा ग्रह ही पानी में समा सकता था, लेकिन आज रेड प्लैनेट पूरी तरह से सूखा और बंजर नजर आता है। हालांकि, नई रिसर्च के मुताबिक, मंगल पर आने वाले तेज धूल भरे तूफान, जिन्हें रॉकेट स्टॉर्म कहा जाता है, ने ग्रह को बंजर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई होगी। (फोटो साभार: iStock)
मंगल पर पहले नदियां, झीलें और पानी का चक्र मौजूद था। जब धूल भरे तूफान आते हैं, तो वे पानी की भाप को ग्रह के ऊपरी वातावरण तक पहुंचा देते हैं। वहां सूरज की तेज यूवी किरणें पानी को तोड़ देती हैं। इसके बाद हल्का हाइड्रोजन अंतरिक्ष में उड़ जाता है और धीरे-धीरे पानी कम होता जाता है। (फोटो साभार: iStock)
वैज्ञानिकों ने मंगल पर ड्यूटेरियम/हाइड्रोजन (D/H) रेशियो मापा। यह पृथ्वी से 5-8 गुना ज्यादा है। इससे पता चलता है कि मंगल से हल्का हाइड्रोजन बहुत ज्यादा मात्रा में अंतरिक्ष में उड़ चुका है जिसका मतलब है कि पानी खत्म हो गया। (फोटो साभार: iStock)
खगोलविदों का पहले मानना था कि पानी का नुकसान सिर्फ मंगल के दक्षिणी गर्मियों में होता है, लेकिन हालिया स्टडी में उत्तरी गोलार्ध में भी एक शक्तिशाली 'रॉकेट स्टॉर्म' देखा गया, जिसने सालभर पानी नष्ट होने की प्रक्रिया को साबित किया। (फोटो साभार: iStock)
नई स्टडी बताती है कि मंगल ग्रह पर मौजूद पानी एक समय में नहीं, बल्कि पूरे साल धीरे-धीरे खत्म हुआ। पहले मंगल का झुकाव ज्यादा हो सकता था, जिससे ऐसे तूफान ज्यादा बनते थे और पानी तेजी से खत्म हुआ। (फोटो साभार: iStock)
खगोलविद ने तीन अलग-अलग अंतरिक्ष यानों पर लगे कम से कम छह अलग-अलग उपकरणों के डेटा की बदौलत यह स्टडी की। (फोटो साभार: iStock)