Artemis II मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ और इंसान फिर से चांद की ओर बढ़ा। यह मिशन 50 साल बाद इंसानों को चांद के पास ले जाने वाला प्रोग्राम है। मिशन के शुरुआत में सब कुछ सही चल रहा था, तभी अचानक एक तकनीकी समस्या सामने आई।
लॉन्च के कुछ ही घंटों बाद स्पेसक्राफ्ट के टॉयलेट सिस्टम में खराबी आ गई। खासतौर पर वेस्टवॉटर (मूत्र) को बाहर निकालने वाला सिस्टम जाम हो गया। यह वही सिस्टम था जो अंतरिक्ष में मानव जीवन के लिए बेहद जरूरी है।
स्पेस में टॉयलेट सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत है। खराबी के कारण एस्ट्रोनॉट्स को बैकअप सिस्टम (जैसे कंटिजेंसी यूरिनल) का इस्तेमाल करना पड़ा। टॉयलेट पूरी तरह बंद नहीं था, लेकिन वेस्ट फ्लश नहीं हो पा रहा था। ऐसे में एस्ट्रोनॉट्स को वैकल्पिक सिस्टम (portable urine containers) का इस्तेमाल करना पड़ा।
टॉयलेट के यूरिन सिस्टम में केमिकल रिएक्शन और तकनीकी गड़बड़ी के कारण सिस्टम सही से काम नहीं कर रहा था। वहीं, फीकल (मल) सिस्टम ठीक था। NASA के अनुसार, केमिकल रिएक्शन के कारण सिस्टम में छोटे-छोटे कण (debris) बने, जो फिल्टर में फंस गए और पाइपलाइन ब्लॉक हो गई।
ह्यूस्टन से इंजीनियर्स लगातार गाइड कर रहे थे। सिस्टम को रीस्टार्ट और एडजस्ट किया गया, जिससे कुछ हद तक समस्या ठीक हुई।
NASA की एस्ट्रोनॉट Christina Koch ने मिशन कंट्रोल की मदद से सिस्टम को ठीक करने की जिम्मेदारी संभाली और खुद इसे सुधारने में जुट गईं।
स्पेसक्राफ्ट का टॉयलेट पृथ्वी के टॉयलेट से बिल्कुल अलग होता है क्योंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता। यहां पानी से फ्लश नहीं किया जाता, बल्कि वैक्यूम (सक्शन) की मदद से वेस्ट को खींचा जाता है। इसमें तरल (मूत्र) और ठोस वेस्ट को अलग-अलग टैंकों में रखा जाता है, जहां मूत्र को साफ करके दोबारा पीने योग्य पानी में बदला जाता है। एस्ट्रोनॉट्स को इस्तेमाल के दौरान सीट से खुद को बेल्ट और फुट रेस्ट्रेंट से बांधना पड़ता है ताकि वे तैर न जाएं। साथ ही, बदबू और बैक्टीरिया को कंट्रोल करने के लिए फिल्टर और केमिकल्स का उपयोग किया जाता है, इसलिए यह एक बेहद एडवांस और जरूरी सिस्टम होता है।
बता दें कि ओरियन स्पेसक्राफ्ट में लगा टॉयलेट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) वाले टॉयलेट जैसा है, लेकिन यह पहली बार किसी क्रूड डीप स्पेस मिशन में इस्तेमाल हो रहा है। अपोलो मिशन के एस्ट्रोनॉट्स के पास टॉयलेट नहीं था, वे स्पेशल बैग इस्तेमाल करते थे। ओरियन 5 मीटर चौड़ा और 3 मीटर ऊंचा है।