विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहला मिशन छोटे सैटेलाइटों वाला है। हम इसे भारी सैटेलाइटों के साथ आगे बढ़ाएंगे और यह डॉकिंग प्रौद्योगिकी हमें भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और उसके बाद के मिशन की स्थापना में मदद करेगी।
जितेंद्र सिंह ने बताया कि इसरो का स्पैडेक्स मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नए युग की शुरुआत है, जो भारत की तकनीकी क्षमता और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। 'डॉकिंग' क्षमता भविष्य के मिशनों को अंतरिक्ष में पेलोड के स्थानांतरण के माध्यम से अकल्पनीय परिणाम प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी, जो एक तरह का चमत्कार होगा और विकसित भारत का प्रमाण होगा। (फोटो साभार: ISRO)
इसरो इस साल कम से कम आधे दर्जनभर मिशनों को लॉन्च करने वाला है। इस साल स्पैडेक्स, निसार, महिला रोबोट 'व्योममित्र', गगनयान सहित अन्य मिशन लॉन्च होंगे।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नासा- इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) सैटेलाइट लॉन्च कर सकता है जिसे अपनी तरह का सबसे महंगा सैटेलाइट है। इस सैटेलाइट की अनुमानित लागत 12,505 करोड़ बताई जा रही है। (फोटो साभार: NASA)
जितेंद्र सिंह ने बताया कि हमारा मानव युक्त अंतरिक्ष उड़ान गगनयान 2025 के अंत तक या 2026 की शुरुआत में होगा। उन्होंने कहा कि यह मिशन मानव रहित मिशन की सफलता पर निर्भर करता है। बता दें कि इसरो ने मार्च से पहले गगनयान मिशन के लिए ‘क्रू एस्केप सिस्टम’ का परीक्षण करने की भी योजना बनाई है। (फोटो साभार: ISRO)
बकौल इसरो, गगनयान के पहले मानवरहित मिशन को भी नए साल की पहली तिमाही में लॉन्च किया जा सकता है। इस मिशन में व्योममित्र रोबोट को शामिल किया जाएगा।