चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा को ढक लेती है। इस समय सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती है और लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं। यही कारण है कि पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा चमकीले सफेद की बजाय लाल या नारंगी रंग का दिखाई देता है। यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होती है।
इस बार पूर्ण चंद्र ग्रहण का सबसे महत्वपूर्ण चरण, जिसे “पूर्णता” कहा जाता है, लगभग 58 मिनट तक रहेगा। यह चरण भारतीय समय के अनुसार दिन के समय होगा। चंद्रग्रहण का प्रारंभ दोपहर 3.20 बजे से जारी है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में रहेगा और उसका रंग गहरा लाल दिखाई देगा।
यह चंद्र ग्रहण पृथ्वी के रात वाले हिस्सों में दिखाई देगा। सबसे स्पष्ट और लंबा दृश्य उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर के आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया में यह शाम के समय दिखाई देगा, जबकि उत्तरी और मध्य अमेरिका में यह सुबह के समय नजर आएगा। हालांकि अफ्रीका और यूरोप के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
खगोलविदों के अनुसार, इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती। इसे नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है। बेहतर अनुभव के लिए साफ आसमान और अंधेरी जगह का चयन करना चाहिए। यदि आप दूरबीन या टेलीस्कोप का उपयोग करते हैं, तो यह दृश्य और भी अधिक स्पष्ट और शानदार दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा धीरे-धीरे अपनी चमक खोता है और फिर गहरे लाल रंग में बदल जाता है। यह दृश्य खगोल विज्ञान प्रेमियों और आम लोगों के लिए एक दुर्लभ और आकर्षक अनुभव होता है। 3 मार्च को होने वाला यह ब्लड मून भी ऐसा ही शानदार नजारा पेश करेगा, जिसे देखने के लिए लोग उत्साहित हैं।
ब्लड मून का प्रभाव राशियों पर अलग-अलग होता है। कुछ राशियों जैसे मेष, तुला, वृश्चिक के लिए यह तनाव और भ्रम का समय हो सकता है। वहीं, मकर, कर्क, कुंभ जैसे राशि जातकों के लिए आत्मनिरीक्षण और परिवर्तन का अवसर हो सकता है। ग्रहण काल में चंद्रमा का बल क्षीण होता है, जिससे मानसिक असंतुलन, भावनात्मक उथल-पुथल, और नींद में व्यवधान देखने को मिल सकते हैं।
बता दें कि चंद्र ग्रहण का समय आत्मचिंतन, संयम और साधना का है। ग्रहण के दौरान और बाद में मंत्रजप, ध्यान और दान-पुण्य से नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है।