1.5 लाख प्रकाश वर्ष दूर वैज्ञानिकों ने खोज निकाला प्राचीन ब्रह्मांड का दुर्लभ तारा

Universe Rare Ancient Star: अनंत ब्रह्मांड अपने भीतर असंख्य रहस्यों को समेटे हुए हैं और वैज्ञानिक लगातार उन्नत और शक्तिशाली टेलीस्कोपों की मदद से उनकी गहराइयों में झांकने की कोशिशें कर रहे हैं। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने सुदूर अंतरिक्ष में प्राचीन ब्रह्मांड का एक बेहद दुर्लभ तारा खोज निकाला है। जिसकी चौतरफा चर्चाएं हो रही हैं। यह तारा एक बौनी आकाशगंगा में देखा गया है तो चलिए विस्तार से इसके बारे में जानते हैं।

Slideshow/s by: अनुराग गुप्ताUpdated Mar 20 2026, 17:07 IST
दुर्लभ प्राचीन तारे की खोजImage Credit : NASA/Hubble/ESA/iStock01 / 07

दुर्लभ प्राचीन तारे की खोज

वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के शुरुआती समय का एक बेहद दुर्लभ तारा खोजा है। यह खोज 'कॉस्मिक आर्कियोलॉजी' यानी अंतरिक्ष के इतिहास को समझने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/Catholic University of America))

कहां मिला यह ताराImage Credit : NASA/Hubble/ESA/iStock02 / 07

कहां मिला यह तारा

पृथ्वी से लगभग 150,000 प्रकाश वर्ष दूर पिक्टर तारामंडल में स्थित बौनी आकाशगंगा पिक्टर II में यह तारा मिला है। इस तारे को PicII-503 नाम दिया गया है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/ESA Hubble Space)

आयरन की मात्रा बेहद कमImage Credit : NASA/Hubble/ESA/iStock03 / 07

आयरन की मात्रा बेहद कम

इस तारे की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें आयरन की मात्रा बेहद कम है। आसान शब्दों में कहें तो इस तारे में आयरन की मात्रा सूरज की तुलना में लगभग 40,000 गुना कम बताई जा रही है। यह इसे अब तक खोजे गए सबसे पुराने और आदिम तारों में शामिल करता है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/ESA)

कार्बन की अधिकता का रहस्यImage Credit : NASA/Hubble/ESA/iStock04 / 07

कार्बन की अधिकता का रहस्य

PicII-503 में जहां आयरन बहुत कम है, वहीं कार्बन की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई है। इसका कार्बन-टू-आयरन अनुपात सूरज से करीब 1500 गुना अधिक है, जो इसे और भी खास बनाता है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/ESA Hubble Space)

क्यों अहम है यह खोज?Image Credit : NASA/Hubble/ESA/iStock05 / 07

क्यों अहम है यह खोज?

यह खोज ब्रह्मांड के शुरुआती रासायनिक विकास को समझने में मदद करती है। साथ ही यह बताती है कि पहली पीढ़ी के तारों ने कैसे अगली पीढ़ी के तारों को जन्म दिया और आकाशगंगाओं के विकास में योगदान दिया। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: iStock)

कैसे हुई खोज?Image Credit : NASA/Hubble/ESA/iStock06 / 07

कैसे हुई खोज?

इस खोज में Dark Energy Camera और Very Large Telescope जैसे शक्तिशाली उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। इनसे मिले डेटा ने इस तारे की खास संरचना को उजागर किया। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: iStock)

पहली पीढ़ी के तारों से जुड़ावImage Credit : NASA/Hubble/ESA/iStock07 / 07

पहली पीढ़ी के तारों से जुड़ाव

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तारा दूसरी पीढ़ी (POP II) का है, जो पहली पीढ़ी (POP III) के तारों के विस्फोट के बाद बने तत्वों से बना है। इससे हमें शुरुआती तारों के बनने और खत्म होने की प्रक्रिया समझने में मदद मिलती है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/Catholic University of America)

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