वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के शुरुआती समय का एक बेहद दुर्लभ तारा खोजा है। यह खोज 'कॉस्मिक आर्कियोलॉजी' यानी अंतरिक्ष के इतिहास को समझने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/Catholic University of America))
पृथ्वी से लगभग 150,000 प्रकाश वर्ष दूर पिक्टर तारामंडल में स्थित बौनी आकाशगंगा पिक्टर II में यह तारा मिला है। इस तारे को PicII-503 नाम दिया गया है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/ESA Hubble Space)
इस तारे की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें आयरन की मात्रा बेहद कम है। आसान शब्दों में कहें तो इस तारे में आयरन की मात्रा सूरज की तुलना में लगभग 40,000 गुना कम बताई जा रही है। यह इसे अब तक खोजे गए सबसे पुराने और आदिम तारों में शामिल करता है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/ESA)
PicII-503 में जहां आयरन बहुत कम है, वहीं कार्बन की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई है। इसका कार्बन-टू-आयरन अनुपात सूरज से करीब 1500 गुना अधिक है, जो इसे और भी खास बनाता है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/ESA Hubble Space)
यह खोज ब्रह्मांड के शुरुआती रासायनिक विकास को समझने में मदद करती है। साथ ही यह बताती है कि पहली पीढ़ी के तारों ने कैसे अगली पीढ़ी के तारों को जन्म दिया और आकाशगंगाओं के विकास में योगदान दिया। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: iStock)
इस खोज में Dark Energy Camera और Very Large Telescope जैसे शक्तिशाली उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। इनसे मिले डेटा ने इस तारे की खास संरचना को उजागर किया। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: iStock)
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तारा दूसरी पीढ़ी (POP II) का है, जो पहली पीढ़ी (POP III) के तारों के विस्फोट के बाद बने तत्वों से बना है। इससे हमें शुरुआती तारों के बनने और खत्म होने की प्रक्रिया समझने में मदद मिलती है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: NASA/Catholic University of America)