जैसा कि काजल का नाम है- काजल 'हिंदुस्तानी', वैसी ही उनकी पहचान है। वह मूल रूप से हिंदू, हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र की बात करती हैं। सवाल उठाती रही हैं कि क्यों और कैसे हिंदू ही अपने हिंदुस्तान में खतरे में हैं? यही वजह है कि गुजरात में उनके समर्थकों और चाहने वालों में कई लोग उन्हें सूबे में हिंदुत्व की पोस्टरगर्ल और गुजरात की निडर शेरनी भी मानते हैं।
वैसे, वह राजस्थान की रहने वाली हैं और ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनका असल नाम- काजल त्रिवेदी है। उनकी शादी गुजरात में हुई और उनके ससुराल वाले सिंगला हैं, इसलिए वह इस सरनेम का इस्तेमाल करने लगीं।
काजल का दावा है कि गुजरात में कुछ दलित नेताओं ने ब्राह्मणवाद के नाम पर उन्हें टारगेट करने की कोशिश की। ऐसे ही लोगों जवाब देने के लिए उन्होंने अपना सरनेम सिंघला हटाकर हिंदुस्तानी कर दिया था।
उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने सरनेम से जुड़ा पूरा किस्सा बताते हुए कहा था, 'मैं तब से सिंघला की जगह हिंदुस्तानी लिखने लगी।' वैसे, खास बात है कि उनके नाम में इस्तेमाल किए जाने वाले हिंदुस्तानी में हिंदू पर जोर दिया गया है। वह HINDU को बोल्ड और कैपिटल में लिखती हैं... इस तरह उनका नाम Kajal HINDUsthani लिखा जाता है।
ऐसे में समझा जा सकता है कि वह अपने सरनेम में हिंदू को बोल्ड कर के यह साफ संदेश देना चाहती हैं कि उनका मुख्य जोर हिंदू और हिंदुत्व के इर्द-गिर्द ही है।
मौजूदा समय में काजल गुजरात में रहती हैं। काजल के टि्वटर बायो पर दी गई जानकारी के मुताबिक, वह आंतरप्रिन्योर, रिसर्च एनालिस्ट, डिबेटर, सोशल एक्टिविस्ट, भारत समर्थक, राष्ट्रवादी और गर्वान्वित हिंदुस्तानी हैं।
रोचक बात है कि माइक्रो ब्लॉगिंग मंच टि्वटर पर उनका अकाउंट वेरिफाइड है और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (@narendramodi), लेखक और विचारक तारेक फतेह (@TarekFatah), बीजेपी नेता कपिल मिश्रा (@KapilMishra_IND) और भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा (@TajinderBagga) फॉलो करते हैं।
काजल हिंदुस्तानी का दावा है- धर्म की रक्षा करना ही उनके जीवन का मूल मंत्र है। जो लोग अपने दिल की बात समझते हैं, पर कहने में असमर्थ हैं...मैं ऐसे ही लोगों की आवाज हूं। हिंदू जब एक होकर अपने लिए लड़ेगा, तब मेरी मंजिल पूरी होगी।
सरनेम में हिंदुस्तानी शब्द इस्तेमाल करने वाली काजल के पिता तब गुजर गए थे, जब वह बहुत छोटी थीं। उनकी उम्र तब 12 साल थी। सिर से पिता का साया हटने के बाद ही उनका संघर्ष चालू हो गया था।