ELF एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए एक महत्वपूर्ण एसेट के रूप में कार्य करेगी, जिससे पूर्वोत्तर में प्राकृतिक आपदाओं या स्ट्रेटेजिक आवश्यकताओं के दौरान बचाव और राहत कार्यों की त्वरित तैनाती संभव हो सकेगी। दोहरे उपयोग वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में यह ईएलएफ, 40 टन तक के लड़ाकू विमानों और 74 टन के अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमानों के संचालन में सक्षम है।
सरकार ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और अन्य जगहों पर भी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) बनाए हैं। मोरान ELF पूर्वोत्तर को मजबूत बनाने का हिस्सा है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर है। मोरान पूर्वोत्तर का पहला ईएलएफ है।
खास बात यह है कि इस एयरस्ट्रिप पर लड़ाकू और नागरिक विमान दोनों लैंड और टेक ऑफ कर सकते हैं। एयरस्ट्रिप वाले हिस्से के दोनों तरफ बाड़ लगाए गए हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राजमार्ग के पास सड़क के नजदीक बने निर्माण को हटा दिया गया है।
यहां से वह मोरान के लिए रवाना होंगे जहां सुबह 10 बजे के करीब एडवांस्ड लैंडिंग स्थल पर उनका फाइटर प्लेन लैंड करेगा। बता दें कि इस राजमार्ग के 4.2 किलोमीटर हिस्से को एयरस्ट्रिप की तरह तैयार किया गया है। आपात स्थिति के लिए इस एयरस्ट्रिप को तैयार किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय वायु सेना (IAF) इसका इस्तेमाल कर सके।
चाबुआ के पास हाई-वे पर विशेष रूप से बनाए गए एयरस्ट्रिप पर उनका फाइटर प्लेन लैंड करेगा। यहां पीएम के साथ-साथ भारतीय वायु सेना के कई अन्य फाइटर प्लेन भी लैंड और टेकऑफ करेंगे। जानकारी के मुताबिक आईएएफ के कुछ लड़ाकू विमान यहां से फ्लाई-पास्ट करते हुए निकलेंगे।
प्रधानमंत्री कई प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी को गति देना, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और सार्वजनिक परिवहन में सुधार करना है। ये परियोजनाएं पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को एक नई और व्यापक गति प्रदान करेंगी।
प्रधानमंत्री ब्रह्मपुत्र नदी पर लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे। गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ने वाला यह 6-लेन का एक्स्ट्राडोज्ड प्रेस्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) पुल, पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड पुल है। इससे गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 7 मिनट रह जाएगा।