राजीव गांधी की जिस दिन हत्या हुई उस दिन वो दिन में आंध्र प्रदेश में थे, चुनावी कार्यक्रम में व्यस्त थे। तमिलनाडु जाने के प्लान था। शाम के करीब 6 बजे थे जब राजीव गांधी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अपनी चुनावी सभाएं समाप्त कीं और तमिलनाडु के लिए रवाना होने की योजना बनाई। उनका हेलिकॉप्टर मद्रास (तब चेन्नई को इसी नाम से जाना जाता था) के लिए उड़ान भरने के लिए तैयार हो रहा था, राजीव गांधी के पायलट ने अचानक उन्हें बताया कि हेलिकॉप्टर में कुछ तकनीकी खराबी आ गई है और चेन्नई के लिए उड़ान भरना संभव नहीं होगा। निराश राजीव गांधी राज्य अतिथि गृह की ओर चल पड़े।
राजीव गांधी अभी रास्ते में ही थे, गेस्ट हाउस पहुंचे भी नहीं थे कि पुलिस टीम के पास मैसेज आ गया कि हेलीकॉप्टर ठीक हो गया। इसके तुरंत बाद राजीव गांधी ने अपना रास्ता बदला और फिर से एयरपोर्ट की ओर चल पड़े।
राजीव गांधी तुरंत हेलीकॉप्टर में सवार हुए मद्रास के लिए निकल गए, आज मद्रास को चेन्नई के नाम से जाना जाता है। रात 8.30 बजे के आस-पास राजीव गांधी मद्रास एयरपोर्ट पहुंचे, जहां कांग्रेस नेताओं ने राजीव गांधी का स्वागत किया। राजीव गांधी को उस रात श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करना था। रैली के लिए वे पहले ही देर हो चुके थे।
21 मई 1991 को रात के 10.10 बजे राजीव गांधी श्रीपेरंबदूर पहुंचे। वहां एक बहुत बड़ी भीड़ राजीव गांधी का इंतजार कर रही थी। राजीव गांधी के सपोर्ट में नारे लग रहे थे। भीड़ में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग गैलरी बनाई गई थी। राजीव गांधी पहले पुरुषों के सेक्शन में गए और फिर गैलरी की ओर बढ़े जहां महिलाएं उनके सपोर्ट में नारा लगा रही थी, खुशी से चिल्ली रही थी।
भीड़ में करीब 30 साल की एक युवती भी थी, जो जानबूझकर राजीव गांधी की ओर बढ़ रही थी। एक महिला पुलिस कांस्टेबल, ने महिला को रोकने की कोशिश की, लेकिन राजीव गांधी ने कहा कि वो युवती को आने दे। युवती राजीव गांधी को माला पहनाने की कोशिश कर रही थी। वह महिला धनु थी, जो लिट्टे की एक सदस्य थी। जब धनु राजीव गांधी के पास आई, तो उसने अपने शरीर पर बंधे बम को विस्फोट कर दिया। इस विस्फोट में राजीव गांधी और 14 अन्य लोगों की मौत हो गई।
उस दुर्भाग्यपूर्ण रात को करीब 10.25 बजे सोनिया गांधी को किसी ने फोन करके पूछा कि क्या सब कुछ ठीक है। इसी दिन सोनिया गांधी अमेठी से चुनाव प्रचार कर लौटी थीं, थका गांधी परिवार सोने की तैयारी कर रहा था। राजीव गांधी के निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज घर के लिए निकल चुके थे। सोनिया गांधी ने मुसीबत को भांपते हुए तुरंत विन्सेंट जॉर्ज को बुलाया, जो अभी घर पहुंचे ही थे कि मद्रास से फोन आया। उन्हें बुरी खबर मिली थी। जब सोनिया गांधी ने विन्सेंट जॉर्ज को फोन किया, तो वह पहले से ही मद्रास से फोन पर बात कर रहे थे। सोनिया ने विन्सेंट जॉर्ज के फोन कॉल खत्म होने का इंतज़ार किया लेकिन राजीव गांधी के निजी सचिव ने तुरंत उन्हें फोन पर यह बताने की हिम्मत नहीं जुटाई कि क्या हुआ था। विन्सेंट जॉर्ज वापस 10 जनपथ पहुंचे। अब उन्होंने गांधी परिवार को श्रीपेरंबदूर में हुई घटना के बारे में बताया। उस समय तक कांग्रेस के कई नेता 10 जनपथ पर जमा हो चुके थे। सोनिया गांधी की चीखें उन्हें आसानी से सुनाई दे रही थीं।
हत्या की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच में पता चला कि यह हमला लिट्टे द्वारा किया गया था, जो एक तमिल उग्रवादी संगठन था। लिट्टे के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, मुख्य साजिशकर्ता शिवरासन और उसके साथियों ने साइनाइड कैप्सूल खाकर आत्महत्या कर ली। लिट्टे, श्रीलंका में पीस कीपिंग फोर्स की तैनाती से नाराज था। हालांकि फोर्स इंडिया वापस आ चुकी थी, लेकिन इतना तय था कि राजीव के जीतने के बाद वो फिर से लिट्टे के खिलाफ एक्शन लेंगे।