इंडिया फ्रांस इनोवेशन फोरम को संबोधित करते हुए मैक्रों ने मंगलवार को कहा कि फ्रांस को 'मेक इन इंडिया पहल' में एक साझेदार बताया। उन्होंने कहा, 'रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पहल में फ्रांस एक मजबूत साझेदार है। हमारा उच्च स्तर का सहयोग अगली पीढ़ी का इंजन, मल्टी रोल हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां बनाएगा।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 से 2024 के बीच रूस, फ्रांस और इजरायल सबसे बड़े हथियार निर्यातक देशों में शामिल हैं। इस दौरान भारत ने जो हथियार खरीदे उसमें रूस की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत और फ्रांस की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत रही। जबकि 2019 से 2023 के बीच इजरायल की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत रही।
रिपोर्टों और आंकड़ों के मुताबिक भारत के लिए फ्रांस, रूस के बाद दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है। भारत, 114 मल्टी रोल राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांस के साथ 3.25 लाख करोड़ रुपए का सौदा किया है। यही नहीं अप्रैल 2025 में भारत ने नौसेना के लिए 26 राफेल एम खरीदने के लिए 63,000 करोड़ रुपए का सौदा किया।
दोनों देश हैमर मिसाइल का संयुक्त उत्पादन करने जा रहे हैं। इसका समझौता हो गया है। यही नहीं दोनों देश एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए 120 किलोन्यूटन का जेट इंजन भी बनाएंगे। डिफेंस एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि साल 2030 भारतीय वायु सेना (IAF) के बेडे़ में इतने राफेल होंगे जितने कि फ्रांस के पास भी नहीं होंगे। राफेल उड़ाने के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश बन जाएगा।
अपनी रणनीतिक एवं सामरिक चुनौतियों को देखते हुए भारत हथियारों के लिए किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता। वह अपने हथियारों का दायरा बढ़ा रहा है। 2009 से 2013 के बीच भारत ने जो कुल हथियार आयात किए उसमें रूस की हिस्सेदारी करीब 76 प्रतिशत थी। यह हिस्सेदारी 2020-2024 के दौरान घटकर 36 प्रतिशत पर आ गई।
भारतीय नौसेना के पास फ्रांस की तकनीक पर आधारित स्कॉर्पियन क्लास की पनडुब्बियां भी हैं, जिन्हें मझगांव डॉक में बनाया गया है। मिसाइल प्रणाली में MBDA MICA और अन्य फ्रांसीसी हथियार शामिल हैं, जो वायु रक्षा को मजबूत करते हैं। इसके अलावा, फ्रांस की कंपनी Safran के इंजन और एवियोनिक्स उपकरण भी भारतीय हेलीकॉप्टर और विमानों में उपयोग होते हैं।