ब्रह्मोस मिसाइल को जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। यह सेना के ट्रक-माउंटेड मोबाइल लॉन्चर से दागी जा सकती है। इसके लिए मोबाइल ऑटोनोमस लॉन्चर (MAL) का उपयोग होता है, जिससे मिसाइल को कहीं भी तैनात किया जा सकता है। यह न्यूनतम तैयारी समय में फायर की जा सकती है। इस दौरान ब्रह्मोस की रेंज लगभग 450–800+ किमी होती है। हालांकि अब रेंज का अपग्रेड हो रहा है, MTCR के बाद 800+ किमी तक बढ़ाया गया है।
ब्रह्मोस मिसाइल को हवा से भी लॉन्च किया जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल को Su-30MKI जैसे भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। इसे विशेष रूप से वायुसेना के उपयोग के लिए मॉडिफाई किया गया है, ताकि यह सुपरसोनिक गति से लक्ष्य पर हमला कर सके। यह संस्करण हल्का और छोटा होता है, ताकि विमान पर लोड किया जा सके।
Su-30MKI विमान ब्रह्मोस मिसाइल को बड़ी ऊंचाई से लॉन्च करता है। मिसाइल हवा में ही अपना इंजन चालू करती है और फिर स्वतंत्र रूप से सुपरसोनिक स्पीड से लक्ष्य की ओर बढ़ती है। यह दुश्मन की रडार और डिफेंस को चकमा देने में सक्षम है।
ब्रह्मोस मिसाइल को पानी से भी लॉन्च किया जा सकता है, यानी इसे समुद्री जहाजों से लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वॉरशीप, ब्रह्मोस का सबसे पहले परीक्षण और तैनात किया गया प्लेटफॉर्म है।
ब्रह्मोस मिसाइल का नेवी वर्जन भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया एक अत्यंत प्रभावशाली हथियार प्रणाली है, जिसे युद्धपोतों (warships) से लॉन्च किया जाता है। भारत के कई युद्धपोतों पर ब्रह्मोस तैनात है, जैसे: INS Kolkata, INS Chennai, INS Rajput, INS Teg, Tarkash, Trikand। मिसाइल को वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) से लॉन्च किया जाता है। यह जमीन या समुद्र में दूर स्थित लक्ष्य को उच्च सटीकता से मार सकता है।
ब्रह्मोस मिसाइल को सबमरीन यानि कि पनडुब्बी से भी लॉन्च किया जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल को पनडुब्बी से 40-50 मीटर की गहराई से दागा जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल को पनडुब्बी (Submarine) से विशेष तकनीक के माध्यम से लॉन्च किया जाता है, जिसे "Underwater Vertical Launch System (UVLS)" कहा जाता है। यह तकनीक मिसाइल को पानी के नीचे से सतह पर लाकर हवा में लॉन्च करती है — और यह प्रक्रिया तेज़, छिपी हुई और दुश्मन के लिए अप्रत्याशित होती है।
जब सबमरीन से ब्रह्मोस को लॉन्च करने के लिए सिस्टम एक्टिव किया जाता है तो ट्यूब का ढक्कन खुलता है। एक गैस जनरेटर या कोल्ड लॉन्च सिस्टम मिसाइल को ट्यूब से बाहर पानी के ऊपर धकेलता है — बिना इंजन चालू किए। जैसे ही मिसाइल पानी से बाहर निकलती है, इसका रॉकेट इंजन चालू होता है, और यह सुपरसोनिक गति से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है।