एक समय बुनियादी सुविधाओं और उद्योगों से वंचित रहने वाला जमुई का चकाई प्रखंड अब बिहार के बड़े औद्योगिक गलियारे के रूप में उभर रहा है। 9,000 एकड़ जमीन का आवंटन और इथेनॉल प्लांट का निर्माण यह साबित करता है कि आने वाले समय में चकाई न केवल जमुई, बल्कि पड़ोसी जिलों के लिए भी व्यापार और रोजगार का एक बड़ा केंद्र साबित होगा।
पत्रकारों से बातचीत में सम्राट चौधरी ने कहा कि चकाई में स्थापित हो रहा यह प्लांट पूरे भारत का सबसे बड़ा इथेनॉल प्लांट होगा। यह न केवल जमुई जिले के लिए, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है। इस प्लांट के बनने से सीमावर्ती और पिछड़े माने जाने वाले इस इलाके की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में होगी।
प्लांट परिसर का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की प्रगति का बारीक अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं पूरे क्षेत्र का सर्वे किया है और कार्य की गुणवत्ता तथा गति दोनों से वे संतुष्ट हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा या देरी न हो। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार को औद्योगिक रूप से समृद्ध बनाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। उद्योग, निवेश और रोजगार के त्रिकोण के माध्यम से बिहार के समग्र विकास को एक नई दिशा दी जा रही है। चकाई और जमुई की यह परियोजना इसी बड़ी सोच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि उरबा में बन रहे इथेनॉल प्लांट का निर्माण कार्य काफी तेजी से चल रहा है। सरकार की प्राथमिकता इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्च 2027 तक यहां उत्पादन शुरू हो जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को बड़ी रफ्तार मिलेगी।
इस औद्योगिक क्रांति का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय युवाओं को रोजगार के रूप में मिलेगा। अकेले जमुई में बन रहे इस इथेनॉल प्लांट और उससे जुड़ी औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष (Direct) और अप्रत्यक्ष (Indirect) रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे क्षेत्र से होने वाले पलायन पर रोक लगेगी और युवाओं को अपने ही घर के पास आजीविका के साधन मिलेंगे।
इथेनॉल प्लांट के निरीक्षण के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने इलाके में औद्योगीकरण की भावी योजनाओं का भी जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें चकाई क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए चिह्नित की गई करीब 9,000 एकड़ भूमि से संबंधित एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिखाया। सरकार इस पूरी जमीन का उपयोग नए उद्योगों और कारखानों की स्थापना के लिए करने जा रही है।
बिहार सरकार राज्य में नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केवल जमुई जिले में ही करीब 3,400 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश की योजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं। सम्राट चौधरी ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाला निवेश क्षेत्र के आर्थिक ताने-बाने को पूरी तरह बदलकर रख देगा।