ऊन के रेशे बेहद नाजुक और प्राकृतिक प्रोटीन से बने होते हैं। जानकारों के मुताबिक ऊन को पानी से कोई खास परेशानी नहीं होती, लेकिन यह अत्यधिक गर्मी, तेज रगड़ और ऐंठन से बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं। इन गलतियों से इसके रेशे आपस में उलझकर सिकुड़ जाते हैं।
धुलाई के दौरान सबसे बड़ी गलती शॉल को कसकर निचोड़ने या मरोड़ने की की जाती है। ऐसा करने से गीले और नाजुक रेशे अपनी प्राकृतिक बनावट खो देते हैं और शॉल हमेशा के लिए खिंचकर टेढ़ा-मेढ़ा हो जाता है। इसलिए इसे कभी भी हाथों से मरोड़कर पानी न निकालें।
शॉल को हमेशा ठंडे या गुनगुने पानी में ही धोना चाहिए, कभी भी गर्म पानी का इस्तेमाल न करें। धोने के लिए केवल वूल-सेफ लिक्विड डिटर्जेंट या माइल्ड बेबी शैम्पू का ही प्रयोग करें। तेज केमिकल वाले ब्लीच या रेगुलर डिटर्जेंट पाउडर से हमेशा बचना चाहिए।
शॉल को पानी में डुबोकर हल्के हाथों से दबाएं ताकि पानी अंदर तक जा सके, लेकिन इसे भूलकर भी रगड़ें या स्क्रब न करें। पानी बदलते समय तापमान का खास ध्यान रखें, क्योंकि अचानक गर्म-ठंडे पानी के बदलाव से रेशों को झटका लग सकता है। जब पानी साफ हो जाए, तो शॉल को दोनों हाथों से पूरा वजन संभालते हुए बाहर निकालें।
शॉल से पानी सुखाने के लिए इसे मरोड़ने के बजाय एक मोटे और सूखे तौलिए पर फैलाएं। तौलिए के साथ शॉल को धीरे-धीरे गोल लपेटते जाएं और हल्का दबाव डालकर अतिरिक्त पानी सोख लें। यह तरीका शॉल के शेप को सुरक्षित रखता है।
पानी निकालने के बाद शॉल को किसी साफ सूखी तौलिए या मेश रैक पर बिल्कुल फ्लैट फैला दें। इसके किनारों और झालरों को करीने से सेट कर दें। इसे कभी भी सीधे धूप में, हीटर के पास या रस्सी पर लटकाकर नहीं सुखाना चाहिए, वरना यह खराब हो सकता है।
ऊनी शॉल को हर बार पहनने के बाद धोने की जरूरत नहीं होती। एक सीजन में इसे केवल एक या दो बार ही धोएं। इस्तेमाल करने के बाद इसे कुछ देर छांव में हवा में खुला छोड़ दें, जिससे इसकी ताजगी बनी रहे और यह लंबे समय तक नए जैसा चमकता रहे।