विकास दिव्यकीर्ति ने साल 1999 में 'दृष्टि IAS' कोचिंग क्लास शुरू की और फिर आगे ही बढ़ते गए। आज वह सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वह अपने विकास सर की हर बात ध्यान से सुनते हैं। विकास दिव्यकीर्ति बच्चों को मोटिवेट भी करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दूसरों को मोटिवेशन देने वाले विकास दिव्यकीर्ति खुद किन की बातों से मोटिवेट होते हैं?
विकास दिव्यकीर्ति अपने विचारों के पीछे कई लोगों का हाथ बताते हैं। हालांकि वह सबसे ज्यादा जिस दार्शनिक से प्रभावित हुए वह थे रजनीश ओशो।
कॉलेज के दिनों में ओशो के विचारों ने उन्हें बहुत प्रभावित किया और वे कुछ वर्षों तक नास्तिकता के भी अनुयायी रहे। हालांकि विकास अब अज्ञेयवादी हैं।
अज्ञेयवादी वह होता है जो ईश्वर को लेकर कुछ नहीं कहता ना महसूस करता है। उनके माता-पिता आर्य समाज के अनुयायी हैं। उनकी पत्नी सनातन धर्म का पालन करती हैं।
रजनीश ओशो की तमाम बातें विकास दिव्यकीर्ति को जागृत भी करती रही हैं और प्रभावित भी। विकास दिव्यकीर्ति की जीवनशैली में ओशो का दर्शन झलकता भी है।
ओशो के अलावा वह कार्ल मार्क्स और मैक्स वेबर के विचारों के भी प्रभाव में रहे। इन दार्शनिकों ने उनके मन मस्तिक पर गहरी छाप छोड़ी है।