बच्चे को डे केयर भेजने की कोई निश्चित या फिक्स उम्र नहीं होती है, लेकिन बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार आमतौर पर 1 से 2 साल की उम्र इसके लिए सबसे सही मानी जाती है। इस उम्र में बच्चा अपनी मां की गैरमौजूदगी में भी धीरे-धीरे अन्य लोगों के साथ सामंजस्य बिठाना सीख जाता है।
डे केयर भेजने का फैसला करने से पहले यह देखना जरूरी है कि क्या आपका बच्चा कुछ घंटों के लिए आपसे दूर रहने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार है या नहीं। यदि बच्चा आसानी से अजनबियों के बीच सहज हो जाता है, तो यह उसके लिए सकारात्मक संकेत है।
डे केयर केवल बच्चों की देखभाल की जगह नहीं है, बल्कि यह उनके शुरुआती सामाजिक विकास का केंद्र होता है। यहाँ बच्चे अन्य बच्चों के साथ रहना, अपनी चीजें साझा करना और मिलजुलकर खेलना सीखते हैं, जिससे उनके बात करने और समझने के कौशल में सुधार होता है।
अपने बच्चे के लिए किसी भी डे केयर का चयन करते समय वहाँ की सुरक्षा व्यवस्था की अच्छे से जांच कर लें। यह सुनिश्चित करें कि कमरों में पर्याप्त रोशनी हो, खिड़कियां सुरक्षित हों और बच्चों की पहुंच खतरनाक चीजों तक न हो सके।
डे केयर का स्टाफ प्रशिक्षित, अनुभवी और बच्चों के प्रति स्नेह रखने वाला होना चाहिए। बच्चों की देखभाल करने वाले लोगों का स्वभाव ऐसा होना चाहिए कि वे हर बच्चे की छोटी-बड़ी जरूरतों और उनकी भावनाओं को समझ सकें और उन्हें सुरक्षित महसूस करा सकें।
बच्चों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है, इसलिए डे केयर के भीतर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। वहाँ के खिलौने, फर्श, बिस्तर और खाने-पीने के बर्तन पूरी तरह से सैनिटाइज और स्वच्छ होने चाहिए ताकि बच्चा किसी भी तरह के संक्रमण से बचा रहे।
बच्चे को डे केयर भेजना शुरू करने के बाद शुरुआती कुछ हफ्तों तक उसके व्यवहार में आने वाले बदलावों पर खास नजर रखें। यदि बच्चा वहाँ जाने से बहुत ज्यादा डरता है या लगातार रोता है, तो उसके कारणों को समझें और जरूरत पड़ने पर संस्थान में बदलाव करने से न हिचकिचाएं।