AQI 300 पार होते ही फेफड़ों पर बढ़ने लगता है खतरा, जानें प्रदूषण कैसे पहुंचाता है नुकसान

AQI 300 के पार होने पर हवा में सांस लेना फेफड़ों के लिए खतरनाक हो सकता है। डॉ. प्रशांत सक्सेना से जानिए प्रदूषण के गंभीर नुकसान।

Authored by: प्रभात शर्माUpdated Nov 1 2026, 13:15 IST
​प्रदूषण कैसे पहुंचाता है नुकसान​Image Credit : Canva01 / 07

​प्रदूषण कैसे पहुंचाता है नुकसान​

दिल्ली-NCR समेत देश के कई शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों की सेहत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। AQI 300 के पार पहुंचने का मतलब है कि हवा की गुणवत्ता काफी खराब हो चुकी है। ऐसी हवा में सांस लेने से सिर्फ आंखों में जलन, खांसी या गले में खराश ही नहीं होती, बल्कि फेफड़ों पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है। प्रदूषण में मौजूद PM 2.5 जैसे बेहद छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं। आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के डॉ. प्रशांत सक्सेना बता रहे हैं कि जहरीली हवा फेफड़ों को किस तरह नुकसान पहुंचाती है।

​AQI 300 पार होने का क्या मतलब है?​Image Credit : Canva02 / 07

​AQI 300 पार होने का क्या मतलब है?​

AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा की गुणवत्ता बताने का एक पैमाना है। इससे पता चलता है कि हवा में प्रदूषकों का स्तर कितना है। भारत में AQI 301 से 400 के बीच होने पर हवा को बहुत खराब श्रेणी में रखा जाता है। ऐसी हवा में सांस लेना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। आंखों में जलन, खांसी, सांस फूलना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन इसका असर सिर्फ इन परेशानियों तक सीमित नहीं रहता। प्रदूषित हवा फेफड़ों के अंदर तक पहुंचकर उनकी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

​PM 2.5 के छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंचते हैं​Image Credit : Canva03 / 07

​PM 2.5 के छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंचते हैं​

प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, खासकर PM 2.5, सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचते हैं। इन कणों का आकार बेहद छोटा होता है। यही वजह है कि ये फेफड़ों के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच सकते हैं और वहां सूजन व जलन पैदा कर सकते हैं। इसकी वजह से खांसी, गले में खराश और सीने में असहजता महसूस हो सकती है। लंबे समय तक ऐसे प्रदूषकों के संपर्क में रहने से फेफड़ों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

​सांस की नलियों में बढ़ सकती है सूजन और जलन​Image Credit : Canva04 / 07

​सांस की नलियों में बढ़ सकती है सूजन और जलन​

प्रदूषण के कारण सांस लेने वाली नलियों में जलन और सूजन बढ़ सकती है। इससे सांस की नलियां संकरी हो सकती हैं और हवा के आने-जाने में परेशानी होने लगती है। ऐसी स्थिति में कुछ लोगों को सीने में जकड़न, घरघराहट और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए यह परेशानी ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि प्रदूषण उनके लक्षणों को बढ़ा सकता है।

​फेफड़ों की नेचुरल सफाई व्यवस्था भी होती है प्रभावित​Image Credit : Canva05 / 07

​फेफड़ों की नेचुरल सफाई व्यवस्था भी होती है प्रभावित​

हमारे फेफड़ों और सांस की नलियों में सीलिया (Cilia) नाम की छोटी-छोटी बाल जैसी संरचनाएं होती हैं। ये धूल और हानिकारक कणों को बाहर निकालने में मदद करती हैं। इस तरह ये सांस लेने के रास्ते को साफ रखने का काम करती हैं। लेकिन लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से इस प्राकृतिक सफाई व्यवस्था की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे हानिकारक कणों को बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है और संक्रमण व सांस संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

​लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से बढ़ सकता है अस्थमा और COPD का खतरा​Image Credit : Canva06 / 07

​लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से बढ़ सकता है अस्थमा और COPD का खतरा​

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेता है, तो उसके फेफड़ों की सेहत प्रभावित हो सकती है। खासकर उन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है, जिन्हें पहले से सांस संबंधी बीमारियां हैं। प्रदूषण अस्थमा और सीओपीडी (COPD) जैसी बीमारियों के लक्षणों को बढ़ा सकता है। इससे खांसी, सांस लेने में परेशानी और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं ज्यादा गंभीर हो सकती हैं।

​सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें​Image Credit : Canva07 / 07

​सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें​

अगर प्रदूषण के संपर्क में रहने के बाद आपको सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में तेज दर्द या सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। हमें समझना होगा कि वायु प्रदूषण का असर सिर्फ शरीर के बाहरी हिस्सों पर नहीं पड़ता। जहरीली हवा शरीर के अंदर जाकर फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए प्रदूषण के बढ़ते स्तर को हल्के में लेना सही नहीं है।

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