विवेकानंद कहते थे कि उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। उन्होंने 1893 में शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में बिना तैयारी के, बिना नोट्स के भारत का प्रतिनिधित्व किया और दुनिया को देश की ताकत बताई।
स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि शिक्षा वह है जो मनुष्य को मनुष्य बनाती है। हमे सीखना चाहिए कि किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है नैतिकता, साहस और मानवता है।
जो जीव है, वही शिव है- अपने इस विचार में स्वामी विवेकानंद ने गरीबों, दलितों और बीमारों की सेवा को ईश्वर की पूजा बताया। रामकृष्ण मिशन की स्थापना इसी विचार से हुई।
डरो मत, डरने से कुछ नहीं होता। विवेकानंद ने कहा कि डर मन का सबसे बड़ा दुश्मन है। सच्चा धर्म डर नहीं, प्रेम और साहस सिखाता है।
उन्होंने युवाओं को भारत का भविष्य बताया। वह कहते थे कि मुझे 100 ऊर्जावान युवा दो, मैं भारत बदल दूंगा। आज भी उनकी बातें युवाओं को प्रेरित करती हैं।
शिकागो भाषण में उन्होंने कहा, - सभी धर्म सत्य हैं, जैसे अलग-अलग नदियां समुद्र में मिलती हैं। उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता और एकता का संदेश दिया।
वह हमेशा कहते थे कि मजबूत शरीर में ही मजबूत मन रहता है। विवेकानंद ने शारीरिक स्वास्थ्य को आध्यात्मिक विकास का आधार बताया।