अभिषेक बच्चन ने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में यह बयान दिया था कि, पेरेंट्स बच्चों के दोस्त नहीं बन सकते हैं। लेकिन मॉडर्न पेरेंटिंग में सबसे पहले यही कहा जाता है कि, आप बच्चों के दोस्त बनकर रहे। हालांकि अभिषेक की सोच इस विषय पर कुछ अलग है। देखें वे आराध्या को किस प्रकार की पेरेंटिंग स्टाइल के साथ बड़ा कर रहे हैं।
अभिषेक मानते हैं कि, बच्चों के साथ खुलकर और प्यार से बात करना जरूरी है। लेकिन माता-पिता की भूमिका दोस्त से अलग होती है। उनका काम सिर्फ साथ निभाना नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन देना भी है।
माता-पिता और बच्चों के बीच ऐसा रिश्ता होना चाहिए कि बच्चा किसी भी परेशानी, डर या उलझन में सबसे पहले अपने माता-पिता से बात करने में सहज महसूस करे।
दोस्ताना व्यवहार अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को यह समझना जरूरी है कि माता-पिता के कुछ नियम और सलाह उनकी भलाई के लिए होते हैं, इसलिए उनका सम्मान करना चाहिए।
बच्चों को यह बताना जरूरी है कि दोस्त और माता-पिता की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं। इससे वे बातचीत और व्यवहार की सीमाओं को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
माता-पिता बच्चों को अनुशासन, जिम्मेदारी और जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य सिखाते हैं। यदि यह सीमा धुंधली हो जाए, तो बच्चों के लिए नियमों का महत्व कम हो सकता है।
माता-पिता और बच्चों के रिश्ते के बीच एक स्वस्थ संतुलन होना चाहिए। बेशक ही अभिषेक की पेरेंटिंग सलाह सही है कि, पेरेंट्स को बच्चों के साथ दोस्ती संतुलन के साथ करनी चाहिए।